नई दिल्ली: क्या आपने अनलिमिटेड हेल्थ इंश्योरेंस के बारे में सुना है? अगर नहीं सुना तो हम आपको बताते हैं. यह ऐसा इंश्योरेंस होता है जिसमें सालाना खर्च की कोई लिमिट नहीं होती है. इसका मतलब है कि चाहें एक साल में बीमारी पर कितना भी खर्च हो, इंश्योरेंस कंपनी उसका भार उठाएगी. हालांकि, कंपनी कुछ शर्तें भी रख सकती है. उदाहरण के लिए, कई कंपनियां यह कहती हैं कि हर बिल में 10 या 20 परसेंट खर्च बीमाधारक को अपनी जेब से देना होगा. इसके अलावा कंपनी कुछ खास बीमारियों के खर्च पर सब लिमिट भी लगा सकती है. अगर इन बातों को नजरअंदाज कर दें तो अनलिमिटेड हेल्थ इंश्योरेंस एक अच्छा बीमा नजर आता है. यही कारण है कि अनलिमिटेड हेल्थ कवर खरीदने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.
वित्त वर्ष 25 में कुल इंश्योरेंस खरीदारों में केवल 0.5 फीसदी ही अनलिमिटेड कवर खरीद रहे थे. वहीं, वित्त वर्ष यानी FY27 में इनकी संख्या बढ़कर 15.19 फीसदी के पार पहुंच गई. यानी केवल 2 साल में 300 फीसदी का इजाफा हुआ है. अनलिमिटेड हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने में वालों में जेन जी की संख्या तेजी से बढ़ रही है. लेकिन एक आंकड़ा यह भी है कि इसे खरीदने वाले हर 10 में से 9 व्यक्ति 45 साल से कम के हैं. इसका मतलब है कि मिलेनियल्स अब भी यहां बढ़त बनाए हुए हैं. पॉलिसीबाजार द्वारा जुटाए गए डाटा से यह बात पता चलती है कि बदलते लाइफस्टाइल और वर्क प्रेशर के कारण लोगों के बीच अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं.
युवाओं की पसंद और फाइनेंशियल प्लानिंग का जरिया
इस प्लान को खरीदने में युवाओं की रुचि सबसे ज्यादा दिख रही है. आंकड़ों के मुताबिक, कुल खरीदारी में मिलेनियल्स की हिस्सेदारी लगभग 57 परसेंट है, जबकि जेन जी का योगदान 30 परसेंट से ज्यादा रहा है. दूसरी तरफ जेन एक्स और बेबी बूमर्स की हिस्सेदारी अभी भी छोटी है, हालांकि, इसमें भी थोड़ी बढ़त देखी गई है. मिलेनियल्स और जेन जी इस प्लान को सिर्फ अपनी मर्जी से की जाने वाली खरीदारी नहीं मान रहे, बल्कि वे इसे फाइनेंशियल प्लानिंग के एक जरूरी टूल के रूप में देख रहे हैं.
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, पुरुषों का दबदबा बरकरार
भले ही अनलिमिटेड कवर प्लान में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन कुल खरीदारी में पुरुषों की हिस्सेदारी अब भी 83 परसेंट से ज्यादा है. महिलाओं का योगदान वित्त वर्ष 25 में 12.4 परसेंट था, जो वित्त वर्ष 27 में बढ़कर 16.3 परसेंट हो गया है. यह दिखाता है कि महिला ग्राहकों के बीच भी बड़े हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर जागरूकता बढ़ी है. वैसे दोनों ही वर्गों में इसे तेजी से अपनाया जा रहा है क्योंकि हर कोई इलाज के बढ़ते खर्च के खिलाफ मजबूत सुरक्षा चाहता है.
छोटे शहर बने ग्रोथ का नया इंजन
अब बड़े हेल्थ कवर सिर्फ बड़े या मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गए हैं. आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 27 में टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा यानी 41 परसेंट से ऊपर रही है. वहीं टियर-2 शहरों का हिस्सा भी वित्त वर्ष 25 के 17 परसेंट से बढ़कर वित्त वर्ष 27 में 25 परसेंट हो गया है. इसके पीछे महामारी के बाद बढ़ी जागरूकता, अस्पतालों का बढ़ता खर्च, डिजिटल पहुंच और छोटे शहरों में मध्यम आय वाले परिवारों का बढ़ना मुख्य वजहें हैं.
अगर औसत टिकट साइज यानी प्रीमियम ग्रोथ की बात करें तो गैर-परंपरागत बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. सूरत में 45 परसेंट की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि हैदराबाद में 43 परसेंट और मैंगलोर में 41 परसेंट की ग्रोथ रही है. बड़े शहरों की बात करें तो एनसीआर में 36 परसेंट, पुणे में 29 परसेंट और बेंगलुरु में 30 परसेंट की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जहां नौकरीपेशा और टेक सेक्टर से जुड़े लोग ज्यादा रहते हैं.
एनआरआई ग्राहकों की पहली पसंद
भारत के बाहर रहने वाले एनआरआई भी अब अपने परिवार के लिए इस प्लान को खूब पसंद कर रहे हैं. डेटा के मुताबिक, इस प्लान को चुनने वाले एनआरआई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 25 में लगभग शून्य थी, जो वित्त वर्ष 26 में 20 परसेंट और वित्त वर्ष 27 में बढ़कर 36 परसेंट हो गई है. यानी अब हर 3 में से 1 से ज्यादा एनआरआई इसे चुन रहे हैं ताकि भारत में रहने वाले उनके माता-पिता को बेहतर सुरक्षा मिल सके और महंगा इलाज उनके ट्रेडिशनल कवर को तुरंत खत्म न कर दे.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पॉलिसीबाजार के हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस हेड सिद्धार्थ सिंघल बताते हैं कि इस ट्रेंड से साफ है कि ग्राहकों की सोच बदल रही है. लोग समझ रहे हैं कि मेडिकल महंगाई से निपटने के लिए पुराने पारंपरिक कवर कम पड़ सकते हैं. राहत की बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ बड़े शहरों में नहीं, बल्कि टियर-2, टियर-3 शहरों, युवाओं और एनआरआई के बीच भी देखा जा रहा है. अब ग्राहक धीरे-धीरे कवर बढ़ाने के बजाय शुरुआत में ही बड़ा या अनलिमिटेड कवर चुनना पसंद कर रहे हैं ताकि इलाज के वक्त अपनी जेब से पैसा न देना पड़े.


























































