नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज करने की योजना रोक दी है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उनके वरिष्ठ सलाहकारों ने चेतावनी दी कि अगर हमला और बढ़ाया गया तो मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सेना के पास मौजूद हवाई सुरक्षा मिसाइलों का भंडार तेजी से कम हो सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को ट्रंप ने अपने कैबिनेट सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें सबसे ज्यादा चिंता पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम के घटते भंडार को लेकर जताई गई. दावा किया गया है कि जनरल डैन केन ने ट्रंप को निजी तौर पर बताया कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान चलाने में सक्षम है, लेकिन ऐसा करने से मध्य पूर्व में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के लिए उपलब्ध एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार खतरनाक स्तर तक घट सकता है.
ईरान-अमेरिका युद्ध में देखा जाए तो हथियार दोनों तरफ से धांसू इस्तेमाल हुए हैं. हालांकि सुपरपावर अमेरिका को उम्मीद नहीं थी कि उनके हथियारों के जवाब में ईरान के गोदाम से वो धुरंधर निकलेंगे, जो सुपरपावर को सुपरसदमा दे देंगे. जब-जब ईरान पर अमेरिका ने अपने हैवी वेपंस का इस्तेमाल किया, तेहरान से छोड़े गए सरप्राइज वेपंस ने पेंटागन को भी हैरान कर दिया. ड्रोन की फौज हो या फिर कुछ ऐसी मिसाइलें, जिन्हें अब तक दुनिया ने नहीं देखा था, ईरान ने हर बार डोनाल्ड ट्रंप के महाक्रोध में बारूद झोंक दिया. चलिए हम आपको ईरान के ऐसे ही 5 धुरंधरों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने अमेरिकी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दूसरे दौर में भी बवाल मचा रखा है.
क्रूज मिसाइलें बनीं काल
क्रूज मिसाइलें समुद्र की सतह के ठीक ऊपर उड़ान भरती हैं और रडार की पकड़ से बचने में माहिर होती हैं.इसमें पहली तो कुद्स फैमिली की मिसाइलें हैं. कुद्स जेड-0 और Sayyad वेरिएंट की रेंज 800 किलोमीटर से अधिक है. फिर अल-मंदेब 2 की बात करें तो इसकी रेंज लगभग 300 किलोमीटर है. इसके अलावा उनके पास पुराने सोवियत और चीनी तकनीक पर आधारित रुबेझ और अल-मंदेब 1 मिसाइल भी हैं, जो भारी विस्फोटक ले जाने में सक्षम हैं.
खैबर शेकन: गायब होकर करती है वार
खैबर शेकन तो साक्षात तबाही है, वो भी अव्वल दर्जे की. यह मिसाइल न सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि अपनी बहुमुखी क्षमता के कारण दुश्मन के लिए खासी खतरनाक साबित हो रही है. IRGC ने पहली बार इसके बारे में साल 2025 में हुए इजरायल-ईरान युद्ध के दौरान बताया था. उसी वक्त खैबर शेकन का परिचय देते हुए ईरान ने कहा था कि उसने सभी हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया है और ये खतरनाक मिसाइल उतरी, तो खाड़ी में सिक्योरिटी सिस्टम में बड़ा बदलाव हो सकता है.
खैबर शेकन 11.4 मीटर लंबी, तीसरी पीढ़ी की ठोस ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे साल 2022 में पेश किया गया था. इसकी मारक क्षमता 1,450 किलोमीटर है, जो इसे मध्यम दूरी की मिसाइल बनाती है.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे कमर्शियल वाहनों से भी लॉन्च किया जा सकता है. इससे दुश्मन के लिए इसे पहले से पहचानना और नष्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है. मिसाइल में सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम लगा है, जिसकी वजह से यह बेहद सटीक निशाना लगाती है.
इसकी सबसे बड़ी विशेषता है, इसमें मैन्यूवरेबल वारहेड है, जो उड़ान के दौरान दिशा बदल सकता है. हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड का वजन करीब 550 किलोग्राम है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक टारगेट पर पहुंचते समय इसकी स्पीड मैक 2 से मैक 3 तक हो सकती है. इतनी तेज गति के कारण पैट्रियट और डेविड्स स्लिंग जैसी एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम के लिए भी इसे रोकना चुनौतीपूर्ण है.
सेजिल – 2: नाचती हुई तबाही
सेजिल-2 ईरान की दूसरी पीढ़ी की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. यह दो चरण वाली और ठोस ईंधन से संचालित होती है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक इसकी लंबाई करीब 18 मीटर, व्यास 1.25 मीटर और वजन लगभग 23,600 किलोग्राम है. यह 700 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकती है. इसकी मारक क्षमता 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक है, यानी ईरान से सीधे इजरायल, सऊदी अरब, कुवैत, एर्बिल और अमेरिकी अड्डों तक पहुंच सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी हाईली मैन्यूवरेबल री-एंट्री व्हीकल है. मिसाइल टारगेट की ओर बढ़ते हुए न सिर्फ तेजी से उड़ती है, बल्कि घूमती-नाचती हुई दुश्मन के रडार को चकमा देती है.
जून 2025 के इजरायल-ईरान 12-दिन के युद्ध में इसने आयरन डोम और ऐरो जैसे एडवांस डिफेंस सिस्टम को धता बता दिया. सेजिल-2 रात के आसमान में लहराती हुई नजर आई, जिसने तेल अवीव के औद्योगिक इलाकों पर लहरा-लहराकर खूब वार किए.
इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम भी इसे रोक नहीं पाया. इसी वजह से दुनिया इसे ‘नाचती हुई तबाही’ कहने लगी. ईरान की मिसाइल क्षमता को मजबूत करने वाली यह प्रणाली पुरानी शाहाब सीरीज से काफी बेहतर है. ठोस ईंधन होने से लॉन्च की तैयारी महज मिनटों में हो जाती है.
2008 में पहला परीक्षण हुआ, जिसमें यह 800 किलोमीटर तक पहुंची. मई 2009 में दूसरा टेस्ट हुआ, जिसमें गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम की जांच हुई. अब तक कुल 6 सफल उड़ान परीक्षण हो चुके हैं. अंतिम टेस्ट में मिसाइल ने 1,900 किलोमीटर की दूरी तय कर हिंद महासागर में गिराई.
थर्ड खोरदाद: अमेरिकी फाइटर जेट्स का काल
मिडिल ईस्ट युद्ध में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जिस नए एयर डिफेंस सिस्टम का दावा किया है, उसने ही F-35 जेट, MQ-9 ड्रोन, A-10 विमान और क्रूज मिसाइलें मार गिराई हैं. इस सिस्टम का नाम थर्ड खोरदाद है. यह ईरान का पूरी तरह घरेलू बना हुआ रोड-मोबाइल मीडियम-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है. 11 मई 2014 को IRGC एयरोस्पेस फोर्स ने इसे पहली बार पेश किया. यह राद एयर डिफेंस परिवार का सबसे एडवांस वर्जन है. ईरान ने रूस से S-300 न मिलने के बाद खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इसे विकसित किया.
इसकी रेंज 50 से 105 किलोमीटर है. ये 25 से 30 किलोमीटर तक ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को मार सकता है. Taer-2B या Taer-2, Sayyad-2/3 सीरीज की मिसाइलें दाग सकता है.
X-बैंड एक्टिव फेज्ड एरे रडार की वजह से 100 टारगेट्स को एक साथ देख सकता है, 4 को एक साथ निशाना बना सकता है और 2 मिसाइलें एक टारगेट पर गाइड कर सकता है.
पैसिव इंफ्रारेड डिटेक्शन सिस्टम: परफेक्ट शिकारी
पैसिव इंफ्रारेड डिटेक्शन सिस्टम ने अमेरिका को सबसे बड़ा झटका दिया है. हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इसी सिस्टम की मदद से अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल जेट को मार गिराया – बिना कोई रडार सिग्नल भेजे. सिर्फ विमान, मिसाइल या ड्रोन से निकलने वाली गर्मी यानि इंफ्रारेड रेडिएशन अमेरिकी F-35, F-15E जैसे स्टेल्थ जेट रडार से बचने के लिए बने हैं, लेकिन गर्मी छिपा नहीं सकते.
पैसिव सिस्टम कोई रडार वेव नहीं भेजता, इसलिए अमेरिकी जेट्स को पता भी नहीं चलता कि उन्हें ट्रैक किया जा रहा है. इलेक्ट्रॉनिक जामिंग और रडार जाम करने वाले सिस्टम भी इस पर काम नहीं करते हैं.
ईरान ने इसे अपने घरेलू थर्ड खोरदाद और माजिद जैसे शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम में इंटीग्रेट किया है.IRGC का दावा है कि यह उनके युवा वैज्ञानिकों का बनाया हुआ है.

























































