नई दिल्ली। देश में NEET धांधली को लेकर मचे घमासान और कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए देशव्यापी छात्र आंदोलनों के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि यह उनके लिए किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है और पिछले दिनों के घटनाक्रम से वे काफी व्यथित थे. इस घटनाक्रम के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपभोक्ता मामले और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है. रविवार को पदभार संभालते हुए प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे पूरी निष्ठा से इस जिम्मेदारी को निभाएंगे. हालांकि, इस समय शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालना किसी ‘कांटों के ताज’ से कम नहीं है.
पीएम मोदी ने प्रह्लाद जोशी को ही क्यों चुना?
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि संकट के इस दौर में पीएम मोदी ने प्रह्लाद जोशी पर ही दांव क्यों लगाया? दरअसल, प्रह्लाद जोशी को मोदी सरकार के सबसे भरोसेमंद और क्राइसिस मैनेजर मंत्रियों में गिना जाता है. इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री रहते हुए उन्होंने कई जटिल विधायी और राजनीतिक संकटों को बेहद शांत और कुशलता से संभाला है. विवादों से दूर रहकर काम करने वाले जोशी को कठिन समय में कड़े और पारदर्शी निर्णय लेने के लिए जाना जाता है. नए कड़े फैसलों को लागू करने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने में उनका अनुभव काफी अहम माना जा रहा है.
प्रह्लाद जोशी के सामने 3 सबसे बड़ी चुनौतियां
नया प्रभार संभालते ही नए शिक्षा मंत्री के सामने देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बहाल करने की तत्काल चुनौती है:
परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास फिर से कायम करना
नीट विवाद, परीक्षा रद्द होने और जन-आंदोलनों के कारण लाखों उम्मीदवारों में असंतोष व्याप्त है. सीजीपी (CJP) जैसे संगठनों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, जोशी के लिए सबसे पहली प्राथमिकता पीड़ित परिवारों और छात्रों को यह भरोसा दिलाना होगा कि राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती जाएगी.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन और नकल माफिया पर नकेल
हाल ही में पारित कड़े एंटी-चीटिंग कानूनों को सख्ती से लागू करना और क्षेत्रीय पेपर-लिक माफियाओं का नेटवर्क ध्वस्त करना जोशी की दूसरी बड़ी परीक्षा होगी. इसके अलावा, परीक्षाओं को लीक से बचाने के लिए ‘पेन-एंड-पेपर’ फॉर्मेट से सुरक्षित ‘कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट’ (CBT) सिस्टम में एक बड़ा तकनीकी बदलाव सुनिश्चित करना होगा.
नई शिक्षा नीति (NEP) का क्रियान्वयन और पोर्टफोलियो प्रबंधन
धर्मेंद्र प्रधान द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को देश के सभी राज्यों में धरातल पर लागू रखना उनकी प्राथमिकता होगी. इसके साथ ही, उपभोक्ता मामले और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा जैसे विशाल विभाग का तालमेल बिठाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा.
एक्शन में दिखे प्रह्लाद जोशी
पदभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने रविवार को कहा, ‘मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य और विनम्रता की भावना के साथ स्वीकार करता हूं. मैं प्रधानमंत्री जी का आभारी हूं. पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने ऐतिहासिक काम किए हैं और पिछले कुछ वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान जी ने नई शिक्षा नीति को आगे बढ़ाया. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में, मैं अपनी पूरी क्षमता से देश की नई शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए काम करूंगा.’
रविवार को छुट्टी के दिन भी मंत्रालय में अधिकाारियों के साथ बैठक कर संसद में नई शिक्षा बिल को लेकर राय-मशविरा करना बता रहा है कि वह काम के प्रति कितने ईमानदार हैं. शायद यही वजह रही होगी कि पीएम मोदी ने शिक्षा मंत्रालय का अहम विभाग दिया. क्योंकि इस विभाग में मोदी शासन काल के 12 साल में चार मंत्री बदल गए हैं. खास बात यह है कि 3 मंत्रियों का पत्ता जुलाई महीने में कट गया. स्मृति ईरानी, प्रकाश जावडेकर, रमेश पोखरियाल निशंक और धर्मेंद्र प्रधान.अब पांचवे मंत्री प्रह्लाद जोशी बने हैं.

























































