नई दिल्ली: ब्रिटेन की ओर से मॉरीशस को सौंपे गए चागोस द्वीप को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ रहा। इस द्वीप समूह पर अपनी संप्रभुता स्थापित करने के लिए भारत की ओर से लगातार मॉरीशस को मदद दी जा रही। ये कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा क्योंकि इससे हिंद महासागर में भारत की भूमिका और भी अहम हो गई है। भारत का ये दांव हिंद महासागर में उसकी ताकत को दिखाता है। साथ ही, यह क्षेत्र में बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ते मुकाबले के बीच भारत को एक सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करता है। मॉरीशस के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का सर्वेक्षण करने में भी भारत मदद करेगा।
मॉरीशस को सर्वे में मदद कर रहा इंडिया
हाल ही में, मॉरीशस के प्रधानमंत्री भारत आए थे। उस समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस को चागोस द्वीप समूह के सर्वेक्षण में मदद करने की बात कही थी। चागोस द्वीप अब मॉरीशस का हिस्सा है। इसलिए मॉरीशस का Exclusive Economic Zone यानी विशेष आर्थिक क्षेत्र भी बढ़ गया है। EEZ का मतलब होता है, समुद्र का वह क्षेत्र जहां किसी देश को मछली पकड़ने, तेल निकालने जैसे काम करने का विशेष अधिकार होता है।
मॉरीशस को इसलिए चाहिए भारत का सपोर्ट
चागोस द्वीप समूह के मिलने से मॉरीशस का समुद्री क्षेत्र बढ़ गया है। अब मॉरीशस को 2.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर निगरानी रखनी होगी। मॉरीशस के पास अभी कम संख्या में गश्त करने वाले जहाज हैं। ऐसे में भारत लगातार मॉरीशस की मदद कर रहा है। वहीं भारत-मॉरीशस के बीच एक और समझौता हुआ है।
भारत जल्द बनाएगा सैटेलाइट ट्रैकिंग स्टेशन
मॉरीशस में जल्द ही भारत एक सैटेलाइट ट्रैकिंग स्टेशन बनाएगा। यह स्टेशन सैटेलाइट से डेटा प्राप्त करने में मदद करेगा। यह भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति होगी। मॉरीशस चागोस द्वीप पर अपना झंडा फहराना चाहता है। इसके लिए वह भारत के जहाज का इस्तेमाल करेगा। यह एक बड़ा प्रतीकात्मक कदम है। इससे यूके (UK) को भी एक मैसेज जाएगा। ब्रिटेन ने पहले ही मॉरीशस को चागोस जाने के लिए जहाज देने की पेशकश की थी। भारत का मॉरीशस को दिया जा रहा सहयोग दिखाता है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में कितना एक्टिव है।

























































