नई दिल्ली। सनातन धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सुख-सौभाग्य का कारक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सरगी खाती हैं और रात्रि में चंद्रमा का पूजा करने के बाद व्रत खोलती हैं।
इस दिन निर्जला व्रत रखने का विधान है। इस दिन करवा माता की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में मजबूती आती है।
इतना ही नहीं, यह व्रत अविवाहित महिलाएं भी मनचाहा वर पाने के लिए करती हैं।
अब ऐसे में इस दिन किस विधि से चंद्रमा की पूजा करना है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? आइए इस लेख में ज्योतिषाचार्य पंडित दयानंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं।
करवा चौथ के दिन चांद निकलने का मुहूर्त क्या है?
करवा चौथ के दिन चंद्रोदय का शुभ समय रात 08 बजकर 47 मिनट पर होगा। इसके बाद विधिवत रूप से पूजा-पाठ कर सकते हैं।
करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
इस दिन करवा माता की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 16 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 29 मिनट तक है। इस दौरान करवा माता की पूजा करें। इससे पति-पत्नी की बीच मधुरता बनी रहती है।
करवा चौथ के दिन पूजा किस विधि से करें?
- करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सोलह श्रृंगार करें।
- उसके बाद सरगी का सेवन सूर्योदय से पहले करें।
- उसके बाद आप भगवान गणेश और करवा माता की पूजा का संकल्प लें।
- प्रदोषकाल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। इस दिन करवा माता की पूजा करने का भी विधान है।
- पूजा की थाली में रोली, अक्षत, मिठाई और जल से भरे करवा रखने का विधान है।
- इस दिन करवा माता की कथा सुनें।
- उसके बाद चंद्रमा निकलने के समय महिलाएं छलनी से चंद्रमा के दर्शन करें और जल अर्पित करें।
- आखिर में सुहागिन महिलाएं छलनी में अपने पति को देखें और उनके हाथ से पानी पीएं और फिर व्रत का पारण करें।

























































