नई दिल्ली। सरकार, सेंट्रल एजेंसीज और राज्य पुलिस की ओर से साइबर फ्रॉड को लेकर लगातार जागरुकता अभियान चलाया जाता है. इसके बावजूद लोग धूर्त ठगों के जाल में फंस ही जाते हैं. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. इसे देश का सबसे बड़ा डिजिट स्कैम (Digital Scam) माना जा रहा है. महानगर के एक 72 वर्षीय बुजुर्ग कारोबारी के साथ देश की अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल ठगी की गई है. महज कुछ महीनों पहले ही उन्होंने एक दवा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी के शेयर बेचकर करीब 50 करोड़ रुपये हासिल किए थे और इसी रकम के चलते वे साइबर ठगों के निशाने पर आ गए.
जानकारी के अनुसार, पीड़ित को 19 अगस्त को पहली बार एक वीडियो कॉल आया था. कॉल करने वाले ने खुद को भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) का अधिकारी बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अवैध संदेश भेजने में हुआ है. इसके बाद ठगों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके बैंक खातों की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के तहत की जा रही है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद शुरू हुआ 40 दिनों का भयावह दौर.
इस अवधि में बुजुर्ग व्यक्ति और उनकी पत्नी (जो पहले बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत थीं) ठगों के डिजिटल गिरफ्त में रहे. उन्हें चार अलग-अलग बैंकों में 27 दिनों तक लगातार लेन-देन करने के लिए मजबूर किया गया, जबकि ठग लगातार फोन कॉल पर बने रहे, ताकि वे हर गतिविधि पर नजर रख सकें. घर पर उन्हें मोबाइल कैमरे के सामने डिजिटल अरेस्ट में रखा गया.
ऐसे दिलाया भरोसा
ठगों ने उन्हें नकली पुलिस थाने और अदालत के दृश्य दिखाकर यह विश्वास दिलाया कि वे वास्तविक कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बात कर रहे हैं. उन्होंने पीड़ित को कुछ दस्तावेज दिखाकर कहा कि उनके खाते में अवैध रकम है और जांच के लिए पूरी राशि अपने खातों में ट्रांसफर करनी होगी. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, 19 अगस्त से 29 सितंबर के बीच बुजुर्ग दंपति ने RTGS के माध्यम से कुल 58.13 करोड़ रुपये ठगों के बताए खातों में भेज दिए.
इस दौरान उन्होंने न तो किसी बैंक को जानकारी दी और न ही अपने बच्चों (जो विदेश में पढ़ रहे हैं) या पड़ोसियों को बताया. मामला तब खुला जब ठगों ने आखिरी बार उनकी पत्नी के खाते में बचे 2 करोड़ रुपये की भी मांग की. दंपति ने अपने एक मित्र से सलाह ली और तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं.
6500 से अधिक अकाउंट
11 दिन बाद उन्होंने महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. अब तक पुलिस करीब 3.5 करोड़ रुपये की रकम को ट्रेस और ब्लॉक कर चुकी है. महाराष्ट्र साइबर पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यशस्वी यादव ने बताया, ‘शिकायत मिलते ही हमने बैंक ट्रांजैक्शन, KYC रिकॉर्ड और लिंक्ड अकाउंट्स का विश्लेषण किया. जांच में 13 लेयरों में फैले 6,500 से अधिक ‘मनी म्यूल अकाउंट्स’ का जाल सामने आया. इनमें से अधिकतर ‘शेल कंपनियों’ के नाम पर खोले गए थे ताकि भारी रकम के लेन-देन पर कोई संदेह न हो.’
डीआईजी संजय शिंत्रे ने बताया कि अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा, ‘ये सभी आरोपी मुंबई और आसपास के इलाकों से हैं, जिन्होंने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते ठगों को उपलब्ध कराए. फर्जी वीडियो कॉल्स राजस्थान और गुजरात से किए जाने का संदेह है.’ पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में ठगों ने बैंक से चेक द्वारा रकम निकालकर उसे दूसरे खातों में जमा किया ताकि ट्रांजेक्शन ट्रेल को तोड़ा जा सके. वर्तमान में महाराष्ट्र साइबर पुलिस की नौ टीमें इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं.

























































