नई दिल्ली। दीपावली खुशियों, रौशनी, उमंग, उत्साह और सुख-सपन्नता का त्योहार होता है। दीपावली हिंदुओं का सबसे बड़ा और प्रमुख प्रमुख त्योहार होता है। यह लगातार पांच दिनों तक चलता है जिसमें अलग-अलग तरह का त्योहार मनाया जाता है। इस कारण से इसे पंच दीपोत्सव पर्व के नाम से जाना जाता है। दिवाली के पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन दीपावली, चौथे दिन गोवर्धन और पांचवें दिन भैया दूज मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, दिवाली हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का महत्व
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ इस दिन भगवान गणेश, माता सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा करने का विधान होता है। हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि के दिन प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का खास महत्व होता है। प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त। यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है।
लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न भी बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यानी प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना शुभ लाभों में वृद्धि और सर्वोत्तम माना जाता है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ लग्न स्थिर लग्न लग्न माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली की रात को अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करने पर माता लक्ष्मी घर में अंश रूप में वास करने लगती हैं।
दिवाली लक्ष्मी पूजा का शुभ
इस वर्ष 20 अक्तूबर को शुभ दीपावली का त्योहार है। दिवाली की रात प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रात 07 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इस तरह के लक्ष्मी पूजन के लिए करीब 01 घंटा 11 मिनट का समय मिलेगा।
दीपावली 2025- शुभ तिथि
- अमावस्या तिथि प्रारम्भ – 20 अक्तूबर को शाम 03:44
- अमावस्या तिथि समाप्त – 21 अक्टूबर को शाम 05:54
दीपावली 2025- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल)
लक्ष्मी-गणेश पूजन मुहूर्त- शाम 07:08 से 08:18 तक
- अवधि- 1 घंटे 11 मिनट
- प्रदोष काल- 05:46 से 08:18 तक
- वृषभ काल- 07:08 से 09 :03 तक

























































