नई दिल्ली: भारत ने Trishul एक्सरसाइज के जरिए अपनी संयुक्त सैन्य ताकत का जबर्दस्त प्रदर्शन किया है. इसमें इंडियन आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की इंटीग्रेटेड स्ट्राइक क्षमता को नए स्तर पर दिखाया गया. 30,000 से ज्यादा जवान, 25 समुद्री वॉरशिप और सबमरीन, कई फाइटर जेट और जमीन-समंदर-आसमान से चलने वाले हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशंस ने यह साफ कर दिया कि भारत अब मल्टी-डोमेन वारफेयर में पूरी तरह तैयार है. पिछले दो हफ्तों में यह मेगा ड्रिल थार डेजर्ट से लेकर कच्छ के मुश्किल इलाके और फिर अरब सागर के विशाल ऑपरेशनल थियेटर तक फैली रही. तीनों सर्विसेज ने एक साथ चलने वाले कॉम्बैट मिशन में हिस्सा लिया.
बुधवार रात सबसे अहम नजारा तब दिखा जब आर्मी के Lt Gen धीरज सेठ, नेवी के Vice Admiral कृष्णा स्वामीनाथन और एयरफोर्स के Air Marshal नगेश कपूर ने INS Vikrant पर चढ़कर लाइव मल्टी-डोमेन ऑपरेशन को खुद देखा. उन्होंने कैरियर-बोर्न फाइटर ऑपरेशन, नाइट फ्लाइंग और अंडरवे रीप्लेनिशमेंट जैसे मिशन क़रीब से मॉनिटर किए.
वेस्टर्न नेवल कमांड ने कहा कि INS Vikrant पर तीनों कमांडर्स का एक साथ मौजूद होना ही दर्शाता है कि भारत तेजी से इंटीग्रेटेड और यूनिफाइड वॉर-फाइटिंग मॉडल की तरफ बढ़ रहा है. इससे तीनों सर्विसेज की जॉइंट ऑपरेशन कैपेसिटी और इंटरऑपरेबिलिटी कई गुना बढ़ती है.
Trishul : क्या था इस एक्सरसाइज का मकसद?
एक्सरसाइज का फोकस सिर्फ मैनूवर नहीं था. इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, साइबर डिफेंस, काउंटर-ड्रोन स्ट्रैटजी, इंटेलिजेंस और सर्विलांस जैसी मॉडर्न वॉरफेयर कैटेगरी को भी परखा गया. मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के मुताबिक यह ड्रिल भारत की ‘इंटीग्रेटेड रेडीनेस’ को बढ़ाने के लिए बनाई गई थी.
रेगिस्तान से लेकर अरब सागर तक चले ऑपरेशंस में इंडियन नेवी की कैरियर स्ट्राइक फोर्स और एयरफोर्स के शोर-बेस्ड एयर एसेट्स ने मिलकर मिशन चलाए. इससे जॉइंट ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉन), इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और साइबर ऑपरेशंस की क्षमता का रियल-टाइम वैलिडेशन हुआ.
गुरुवार को गुजरात के तट पर एक बड़े amphibious landing ऑपरेशन के साथ यह ड्रिल खत्म हुई. साउदर्न कमांड ने इसे ‘जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन का नया बेंचमार्क’ बताया. Lt Gen धीरज सेठ के अनुसार इस एक्सरसाइज ने नए हथियारों, मिलिट्री प्लेटफॉर्म और टैक्टिकल प्रोसीजर को सफलतापूर्वक वैलिडेट किया.
यह पूरा युद्धाभ्यास इस बात की आक्रामक मिसाल बन गया है कि भारतीय सेनाएं तीनों डोमेन्स में एक साथ किसी भी दुश्मन के खिलाफ फुल स्केल ऑपरेशन चलाने की क्षमता रखती हैं.

























































