हरिद्वार। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के हिसाब से त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है. यह दिन भगवान शिव की आराधना, पूजा पाठ करने का विशेष समय होता है. खासकर प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विधान धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है. हरिद्वार एक तीर्थ नगरी है जहां से भगवान शिव के पास जाने का द्वार है. हरिद्वार में जहां भगवान शिव की ससुराल है. यहां अनेक सिद्ध पीठ मंदिर भी हैं जिनका वर्णन धार्मिक ग्रंथों में किया गया है. त्रयोदशी के दिन भगवान शिव की ससुराल और सिद्ध पीठ मंदिरों में जलाभिषेक पूजा पाठ करने से शत्रु बाधा, शत्रु भय खत्म हो जाता है.
हरिद्वार के धर्माचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि एक संवत में कुल 24 पक्षों का आगमन होता है. एक पक्ष में एक त्रयोदशी तिथि भी आती है. त्रयोदशी तिथि में प्रदोष काल के समय भगवान शिव की आराधना, पूजा पाठ और उनका जलाभिषेक करने पर शत्रु बाधा, शत्रु भय खत्म होने के साथ ही शिवलोक की प्राप्ति होने के सभी द्वार खुल जाते हैं. हरिद्वार से शिव लोक जाने का रास्ता है. माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर हरिद्वार में भगवान शिव के सिद्ध पीठ स्थलों पर जाकर उनका अभिषेक गंगाजल, दूध, दही, बेल पत्र, शहद, तिल, जौ आदि से किया जाए तो भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है.
शिव को पाने के लिए
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि हरिद्वार की उपनगरी कनखल में दक्षेश्वर महादेव भगवान शिव की ससुराल है, जहां वे पूरा सावन वास करते हैं. इस स्थल का वर्णन शिव महापुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में किया गया है. कनखल में गंगा किनारे दरिद्र भंजन, दुख भंजन और तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर है, जहां भोलेनाथ का अभिषेक करने पर चमत्कारी फल की प्राप्ति होती है. बिल्व पर्वत श्रृंखला में एक पर्वत पर भगवान शिव का बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर है जहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों साल तक कठोर तप किया था. इसका वर्णन भी धार्मिक ग्रंथो में किया गया है.
कहां-कहां कौन
हरिद्वार नजीबाबाद हाईवे पर भगवान शिव के तीन चमत्कारी और सिद्ध पीठ स्थल हैं. इन स्थलों पर भगवान शिव की बारात ने रुक कर जलपान किया था. एक स्थल पर भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पिया था, जहां का शिवलिंग आज भी नीला है. हरिद्वार नजीबाबाद रोड पर नीलेश्वर महादेव मंदिर वही स्थान है, जहां भोलेनाथ ने मानव कल्याण के लिए कलकुट विष पिया था. आगे चलकर गौरी शंकर महादेव मंदिर है. इसका भी शास्त्रों पुराणों में वर्णन किया गया है. नजीबाबाद रोड पर ही आगे चलकर नील पर्वत की श्रृंखला में कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर है, जहां भगवान शिव की बारात ने जलपान किया था. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, आज भी भगवान शिव के गण यहां पर वास करते हैं. शिव का जलाभिषेक करने पर जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं.

























































