नई दिल्ली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सड़कों पर अतिक्रमण को लेकर BMC को जमकर फटकार लगाई। साथ ही यह तक कह दिया कि कुछ समय में कमिश्नर को भी घोड़े पर दफ्तर आना पड़ सकता है। जस्टिस रविंद्र घुघे और जस्टिस अभय मंत्री की पीठ पवई के एक स्कूल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि अतिक्रमण को लेकर कई शिकायतें देने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई।
अदालत में न्यायाधीशों के सामने अतिक्रमण की तस्वीरें पेश की गईं थीं। वह हीरानंदानी इलाके में करीब 90 फीट चौड़ी सड़क पर अतिक्रमण देखकर नाराजगी जाहिर कर रहे थे। खबर है कि यहां फुटपाथ पर कई झुग्गियां बन गई हैं, जिससे स्कूली छात्रों समेत आम जनता को परेशानी हो रही है।
इसपर जस्टिस घुघे ने कहा, ‘देखा जाए तो इस सड़क से चार कारें एक साथ गुजर सकती हैं, लेकिन अब देखिए क्या हाल हो गया है… यह घटकर सिर्फ एक लेन की रह गई है। मुझे तो यह सोचकर हैरानी होती है कि आने वाले सालों में क्या होगा… लोगों को मोटरसाइकिल छोड़नी पड़ेगी और साइकिल अपनानी होगी… या फिर सबसे अच्छा विकल्प घोड़ा है… घोड़ा भीड़-भाड़ में भी अच्छी तरह रास्ता निकाल लेता है। कल्पना कीजिए कि आपके (BMC के) कमिश्नर घोड़े पर बैठकर अपने ऑफिस आ रहे हैं, तो वह कैसे लगेंगे।’
उन्होंने कहा, ‘मुंबई को आखिर क्या होता जा रहा है? जैसे ही कोई सड़क बनती है, लोग वहां आकर कब्जा जमा लेते हैं… देखिए आप अपने ही शहर का क्या हाल कर रहे हैं। इतनी खूबसूरत सड़क है और आपने इसका क्या बना दिया है? हम नगर निगम के प्रमुख (कमिश्नर) या किसी भी अन्य अधिकारी को कोर्ट बुला सकते हैं और उनसे इस पर जवाब मांग सकते हैं।’
ऐक्शन नहीं लेने के आरोप
स्कूल की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट नौशाद इंजीनियर पेश हुए थे। उन्होंने कोर्ट से कहा कि अवैध अतिक्रमण को लेकर बीएमसी अधिकारियों को कई बार शिकायत की गईं हैं। साथ ही कई बार बैठकें भी की गईं, लेकिन अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।
याचिका में कहा गया है कि सिविक अथॉरिटीज ऐसे अतिक्रमण को टैंकर के जरिए पानी सप्लाई कर, टॉयलेट की व्यवस्था कर बढ़ावा दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि क्षेत्र में 4 स्कूल हैं, जिसके चलते वहां माता-पिता अपने बच्चों को छोड़ने और लेने जाते हैं। इसकी वजह से क्षेत्र में वाहनों का आवागमन ज्यादा होता है और अतिक्रमण की वजह से ट्रैफिक जाम हो जाता है।
क्या बोला कोर्ट
बेंच ने बीएमसी की तरफ से पेश हुए वकील को निर्देशों के लिए समय दिया है। साथ ही कोर्ट को कार्रवाई की जानकारी देने के लिए कहा है।

























































