नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नए सरकारी भवनों का उद्घाटन करने वाले है। इन भवनों के परिसर को सेवा तीर्थ का नाम दिया गया है। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं। दशकों तक देश की सरकारों के फैसलों का गवाह रहा साउथ ब्लॉक अब इतिहास बनने जा रहा है ।
दशकों तक केंद्रीय सरकार के अहम फैसलों का गवाह रहा साउथ ब्लॉक अब इतिहास बनने जा रहा है। आज यानी शुक्रवार 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए सरकारी कार्यालयों के एरिया ‘तीर्थ भवन परिसर’ का अनावरण करेंगे। इस एरिया में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं, जो पहले अलग-अलग भवनों में थे। बाद में प्रधानमंत्री सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 तथा कर्तव्य भवन-2 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और शाम को सेवा तीर्थ में एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय से सामने आई जानकारी के मुताबिक इन भवनों के उद्घाटन से देश की प्रशासनिक शासन संरचना में बदलाव होगा। यह परिसर आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
आज होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने सेवा तीर्थ के उद्घाटन की तारीख को दिल्ली के इतिहास से भी जोड़ा। उन्होंने लिखा, “आज यानी 13 फरवरी 2026 को, स्वतंत्र भारत का इतिहास एक नया मोड़ लेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ब्रिटिश काल के साउथ ब्लॉक से अपने नए पते, सेवातीर्थ में स्थानांतरित हो रहा है। संयोगवश, ठीक इसी दिन 13 फरवरी 1931 को अंग्रेजों ने नई दिल्ली को औपनिवेशिक भारत की राजधानी घोषित किया था। उस औपनिवेशिक घोषणा से लेकर इस निर्णायक परिवर्तन तक का सफर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के औपनिवेशिक विरासत को त्यागने और वास्तव में आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी नए भारत के निर्माण के संकल्प को दर्शाता है।”
आपको बता दें, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत सरकारी कार्यालयों का विकास किया जा रहा था। इस प्रोजेक्ट के पहले यह कार्यालय दशकों तक इस क्षेत्र में कई जगहों पर फैले हुए थे। प्रमुख कार्यालयों के इस फैलाव के कारण संचालन में अक्षमताएं, समन्वय संबंधी चुनौतियां, रखरखाव की बढ़ती लागत और काम करने के लिए अनुपयुक्त वातावरण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती थीं, इसी के चलते सरकार ने इन्हें एक जगह पर करने का फैसला लिया।
कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई प्रमुख मंत्रालय स्थित हैं।
दोनों भवन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं मौजूद हैं। ये सुविधाएं सहयोग, दक्षता, सुचारू संचालन, नागरिकों की बेहतर भागीदारी और कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देंगी। चार-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुसार डिज़ाइन किए गए इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं शामिल हैं।
इन उपायों से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम किया जाएगा। भवन परिसरों में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया अवसंरचना जैसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जिनसे अधिकारियों और आगंतुकों के लिए एक सुरक्षित और सुलभ वातावरण सुनिश्चित होगा।

























































