भुवनेश्वर। ओडिशा में विधायकों (एमएलए) के वेतन और भत्तों में प्रस्तावित बढ़ोत्तरी पर चल रहे बजट सत्र के दौरान पुनर्विचार किया जा सकता है। यदि संशोधन विधेयक की समीक्षा कर उसे दोबारा पारित किया जाता है, तो संशोधित वेतन की सीमा क्या होगी, उसे लेकर चर्चा जारी है।
जानकारी के मुताबिक पिछले शीतकालीन सत्र में ओडिशा विधायक वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2025 सर्वसम्मति से पारित किया गया था। हालांकि, विधायकों के वेतन में लगभग तीन गुना वृद्धि के प्रस्ताव ने राज्य भर में जनता के बीच असंतोष पैदा कर दिया।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने की है मांग
जन विरोध के बाद भाजपा विधानमंडल दल ने मुख्यमंत्री से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। अब यह मामला मौजूदा बजट सत्र में फिर से उठाए जाने की संभावना है।
भाजपा विधायक जयनारायण मिश्रा ने कहा कि वेतन वृद्धि की समीक्षा का निर्णय बीजद द्वारा इस मुद्दे पर यू-टर्न लेने के बाद लिया गया। उन्होंने कहा कि बीजद पार्टी ने इस मुद्दे पर यू-टर्न लेते हुए एक लिखित पत्र सौंपा, जिसमें कहा गया कि उसके सदस्य बढ़ा हुआ वेतन नहीं लेंगे।
इसके चलते सरकार एक असहज स्थिति में आ गई, खासकर इसलिए क्योंकि यह प्रस्ताव पहले ही राज्य विधानसभा में सर्वसम्मति से मंजूर हो चुका था।
वहीं, विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने पूर्व विधायकों के वेतन में वृद्धि का समर्थन किया है।उन्होंने कहा कि पूर्व विधायकों का वेतन बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि उनमें से कई आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए और नवीन पटनायक द्वारा दिए गए लिखित अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

























































