नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से उनके टैरिफ आदेशों को रद्द किए जाने पर गहरी निराशा जताई है. उन्होंने कहा कि अदालत ने पिछले एक साल में टैरिफ के जरिए वसूली गई भारी रकम के भविष्य पर कोई स्पष्टता नहीं दी.व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, ‘हमने सैकड़ों अरब डॉलर इकट्ठा किए हैं. तो मैं पूछता हूं, उस पैसे का क्या होगा? इस पर कोई चर्चा ही नहीं हुई.’उन्होंने आगे कहा, “क्या आपको नहीं लगता कि वे एक लाइन लिख सकते थे पैसा रखा जाए या वापस किया जाए? अब शायद यह मुद्दा अगले दो साल तक मुकदमेबाजी में फंसा रहेगा. यह एक खराब फैसला है, जैसे इसे समझदार लोगों ने नहीं लिखा हो.’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि टैरिफ के रूप में वसूली गई राशि वापस की जाएगी या नहीं. अनुमान है कि 175 अरब डॉलर से अधिक की राशि रिफंड दावों के दायरे में आ सकती है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अगर फैसले के बाद रिफंड देना पड़ा तो ट्रेजरी विभाग इसके लिए तैयार है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि यह प्रक्रिया जटिल हो सकती है.
सेक्शन 122 के तहत नया 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ
सुप्रीम कोर्ट के झटके के तुरंत बाद ट्रंप ने घोषणा की कि वह संघीय कानून के सेक्शन 122 के तहत एक नया एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन करेंगे, जिसके जरिए 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा. यह मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा. इस कदम को ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति का अगला चरण माना जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘हम अदालत में 5 साल तक फंसे रह सकते हैं, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे.’
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
जहां अधिकांश डेमोक्रेट नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, वहीं सीनेट बैंकिंग कमेटी की शीर्ष डेमोक्रेट एलिज़ाबेथ वॉरेन ने चेतावनी दी कि उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के पास पहले से चुकाए गए टैरिफ की रकम वापस पाने का कोई स्पष्ट कानूनी सिस्टम नहीं है. यह फैसला न केवल ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति के लिए झटका है, बल्कि कार्यपालिका और विधायिका के अधिकारों के बीच संतुलन पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है.

























































