नई दिल्ली। प्राचीन दुनिया में ताकत का मतलब सिर्फ जमीन या दौलत नहीं होता था. बल्कि उस समय बड़ी और संगठित सेना को ताकत का प्रतीक माना जाता था. उस दौर में हथियार कम मात्रा में होते थे. संचार के साधन कमजोर थे. फिर भी कुछ साम्राज्यों ऐसे थे, जिन्होंने लाखों सैनिकों की फौज बनाई, उन्हें खाना दिया, वेतन दिया, और दूर-दराज इलाकों में लड़ने भेजा था.
इतिहासकार मानते हैं कि किसी भी प्राचीन सेना का आकार दो बातों पर निर्भर करता था. एक थी जनसंख्या, दूसरी थी शासन की व्यवस्था कितनी मजबूत और केंद्रीकृत है. जहां राजा का सीधा कंट्रोल था. यही बड़ी वजह थी कि वो बड़ी सेनाओं को आसानी से रख पाते थे. आज हम आपको ऐसे 5 सबसे प्राचीन और ताकतवर सेनाओं के बारे में बताएंगे. जो सिर्फ युद्ध नहीं जीतती थीं. बल्कि पूरे इलाके की राजनीति और सभ्यता की दिशा तय करती थीं.
किन डायनेस्टी की महान सेना
तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में चीन को एक करने का काम इसी वंश ने किया था. सम्राट चिन शि हुआंग बेहद सख्त और अनुशासनप्रिय शासक थे. उन्होंने पूरे चीन में सैन्य सेवा को प्राथमिकता बना दिया था. आम लोगों के लिए सेना में भर्ती होना जरूरी था. इसे वहां के कानूनी व्यवस्था से जोड़ा गया था. इसी कारण बहुत बड़ी संख्या में सैनिक तैयार हो सके. उस समय उनकी सेना का मुख्य आधार पैदल सैनिक थे. जीत के बाद जीते हुए इलाकों में बड़ी टुकड़ियां तैनात कर दी जाती थीं. ताकि विद्रोह न हो पाए.
इतिहासकारों के मुताबिक पूरे साम्राज्य में उनके पास लगभग दस लाख सैनिक अलग-अलग मोर्चों पर मौजूद थे. ये संख्या उस दौर के हिसाब से असाधारण मानी जाती है. सम्राट को अपनी सैन्य शक्ति पर इतना भरोसा था कि उन्होंने अपने मकबरे के पास टेराकोटा सैनिकों की विशाल मूर्तियां भी बनवाई थी. ये सेना संख्या में बहुत बड़ी थी. लेकिन प्रशिक्षण की तुलना में भर्ती की मात्रा पर ज्यादा जोर दिया गया था.
हान डायनेस्टी की फौज
किन साम्राज्य के बाद चीन में हान वंश आया था. ये वही दौर था जब यूरोप में रोम ताकतवर बन रहा था. हान डायनेस्टी के चरम समय में करीब छह से सात लाख सैनिक मौजूद थे. हर पुरुष को एक साल की अनिवार्य सैन्य सेवा करनी पड़ती थी. सेवा पूरी होने के बाद उन्हें रिजर्व सैनिक माना जाता था. जरूरत पड़ने पर फिर बुलाया जा सकता था.
आगे चलकर हान शासकों ने पेशेवर सैनिकों और भाड़े के लड़ाकों पर भरोसा बढ़ाया. इससे खर्च कम हुआ और गुणवत्ता बेहतर हुई. लेकिन हर सीमा पर बड़ी टुकड़ी रखना मुश्किल हो गया. फिर भी उस समय हान सेना को दुनिया की सबसे संगठित और मजबूत सेनाओं में गिना जाता था. उत्तरी सीमाओं पर घुड़सवार दस्ते और अंदरूनी इलाकों में पैदल सेना तैनात रहती थी.
मौर्य साम्राज्य की विशाल सेना
भारत में सबसे विशाल शुरुआती सेनाओं में मौर्य साम्राज्य की सेना मानी जाती है. यूनानी इतिहासकार मेगस्थनीज भारत में राजदूत के रूप में रहे थे. उन्होंने मौर्य सेना का विस्तार से वर्णन किया है. उनके मुताबिक मौर्य शासकों के पास लगभग 6 लाख पैदल सैनिक थे. 30 हजार घुड़सवार थे. 9 हजार रथ थे. और करीब 8 हजार लड़ाके हाथी थे. भले ही इन आंकड़ों पर कुछ इतिहासकार बहस करते हैं. लेकिन ये तय माना जाता है कि ये उस समय की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक थी.
इस साम्राज्य में सेना के लिए अलग प्रशासनिक विभाग था. जो भर्ती, प्रशिक्षण, वेतन और राशन देखता था. मुख्य लड़ाई पैदल सेना करती थी. जबकि घुड़सवार दुश्मन की लाइन तोड़ने के काम आते थे. विदेशी भाड़े के सैनिक भी इस सेना में शामिल थे. लगभग 150 वर्षों तक ये सेना पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर प्रभाव बनाए रखने में सफल रही थी.
गुप्ता एम्पायर की ताकतवर सेना
तीसरी से छठी शताब्दी के बीच गुप्त साम्राज्य उत्तर और पूर्वी भारत में फैला हुआ था. चंद्रगुप्त द्वितीय के समय यह अपने चरम पर पहुंच गया था. उस दौर के स्रोत बताते हैं कि गुप्तों के पास लगभग 5 लाख पैदल सैनिक थे. 50 हजार घुड़सवार थे. और करीब 10 हजार लड़ाके हाथी थे. ये सेना रक्षा और आक्रमण दोनों में सक्षम थी.
गुप्त शासकों ने भारी घुड़सवार टुकड़ियों का प्रभावी उपयोग करना सीख लिया था. जिससे दुश्मन की लाइन तेजी से टूट जाती थीं. समुद्र के रास्ते व्यापार की सुरक्षा के लिए उनके पास नेवी भी थी. क्षेत्रीय स्तर पर यह सबसे मजबूत समुद्री शक्ति मानी जाती थी. इसी कारण गुप्त सेना को संतुलित और आधुनिक सोच वाली सेना कहा जाता है.
रोमन एंपायर की प्राचीन सेना
रोमन साम्राज्य में सेना का ढांचा बेहद व्यवस्थित था. साम्राज्य के अलग-अलग हिस्सों से सहायक सैनिक भर्ती किए जाते थे. लेकिन मुख्य सेनाएं रोम के नागरिकों से बनती थीं. सम्राट की सुरक्षा के लिए खास प्रेटोरियन गार्ड बनाया गया था. इसमें लगभग 20 हजार चुने हुए सैनिक होते थे.
इतिहासकारों के मुताबिक रोमन सेना की संख्या अपने शिखर पर लगभग 4 लाख से 5 लाख तक पहुंच गई थी. ये स्थिति सेप्टिमियस सेवेरस के शासनकाल में बनी थी. ये सैनिक सीमाओं की रक्षा करते थे, विद्रोह को दबाने का काम करते थे, और नए इलाकों पर कब्जा करते थे. उनकी रणनीति, अनुशासन और संगठन को बाद की कई सभ्यताओं ने अपनाया था.

























































