नई दिल्ली। भारत सरकार ने एक ऐसे प्रस्ताव पर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं, जिसने ऐपल, सैमसंग और अन्य स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को राहत दी है। फोन बनाने वाली कंपनियों को अपने हैंडसेट में देश का बायोमेट्रिक पहचान ऐप- Aadhaar पहले से इंस्टॉल (प्री-इंस्टॉल) करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। कुछ समय पहले यह प्रस्ताव रखा गया था, जिसका स्मार्टफोन बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने विरोध किया था। ऐपल और गूगल जैसी कंपनियों का मानना था कि फोन्स में पहले से आधार ऐप प्री-इंस्टॉल करने से प्रोडक्शन का खर्चा बढ़ेगा और इससे सुरक्षा खामियां भी आ सकती हैं। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी ना देकर कंपनियों को चिंता खत्म कर दी है।
सरकार नहीं है पक्ष में
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, आधार का सारा काम संभालने वाली सरकारी संस्था UIDAI ने जनवरी, 2026 में IT मंत्रालय से Apple , Google जैसी कंपनियों के साथ बातचीत करने को कहा था ताकि आधार ऐप को फोन्स में पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य बनाने पर विचार किया जा सके। UIDAI ने शुक्रवार को रॉयटर्स (REF.) को दिए एक बयान में कहा कि भारत के IT मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को रिव्यू किया और वह स्मनार्टफोन में आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करने के पक्ष में नहीं है।
2 साल में छठी बार अनुरोध
सरकार के कदम पीछे खींचने की कोई वजह सामने नहीं आई है। रिपोर्ट के अनुसार, UIDAI ने अपने बयान में कहा कि आधार प्रीलोडिंग प्रस्ताव को छोड़ने का फैसला करने से पहले IT मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रकी के स्टेकहोल्डर्स के साथ सलाह मशविरा किया था। हालांकि 2 साल में 6 बार यह मांग की गई थी कि फोन्स में आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल कराया जाए। इन सभी छह प्रयासों का इंडस्ट्री ने विरोध किया था।
कंपनियों को क्या थी दिक्कतें?
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई थी। कंपनियों द्वारा इस प्रस्ताव का विरोध करने के पीछे कई कारण हैं।
- एक परेशानी यह है कि कई कंपनियां एक ही मॉडल को ग्लोबल मार्केट में उतारती हैं। आधार ऐपप्री-इंस्टॉल होने से उन्हें ऐसा करने में दिक्कत आएगी।
- कंपनियों का कहना था कि इससे ना सिर्फ प्रॉडक्शन की लागत बढ़ेगी बल्कि यूजर्स के लिए टेक्निकल समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
- कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कंपनियों को इससे सुरक्षा खामियों की चिंता भी थी। कंपनियों का मानना है कि किसी सरकारी ऐप को पहले से इंस्टॉल करने से सुरक्षा खामियां पैदा हो सकती हैं।
- इस प्रस्ताव पर ऐपल और सैमसंग ने सुरक्षा और डेटा सेफ्टी से जुड़े सवालों के चलते गंभीर चिंता जताई थी।
- कुछ विशेषज्ञों का यह कहना भी था कि किसी ऐप को जबरन नियम बनाकर फोन में डालना यूजर कंट्रोल के खिलाफ है और यह निजी डिवाइस पर कंट्रोल जैसा फील हो सकता है।

























































