नई दिल्ली। देश में सब ठीक है या कुछ बड़ा होने वाला है? यह सवाल रविवार देर शाम से सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक हर किसी के मुंह पर है। आम नागरिक हो या खास, सबके मन में एक ही सवाल घूम रहा है, अचानक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तेल बचाने की अपील क्यों करने लगे? सिकंदराबाद की रैली से शुरू हुई यह अपील तेजी से पूरे देश में फैल गई। अब हर तरफ यही चर्चा है कि तेल का खेल क्या है? अगर कोई खेल नहीं है, तो प्रधानमंत्री के बाद उनके मंत्री और मुख्यमंत्री भी क्यों तेल बचाने की बात कर रहे हैं? क्या कोई अनहोनी होने वाली है?
दरअसल, मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। इसी चिंता के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना के सिकंदराबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से तेल और ऊर्जा बचाने की अपील की। उन्होंने सात सूत्री सुझाव दिए, जिनमें वर्क फ्रॉम होम अनावश्यक वाहन उपयोग कम करना, कार पूलिंग और खाद्य तेल के इस्तेमाल में कटौती शामिल है।
केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र सीएम ने की मोदी की अपील का समर्थन
प्रधानमंत्री की अपील को तुरंत समर्थन मिला। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में संकट का समाधान अभी दूर की बात है। इसलिए हर भारतीय को प्रधानमंत्री की अपील पर अमल करना चाहिए। इसी क्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जनता से आग्रह किया। फडणवीस ने कहा कि अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध ने वैश्विक तेल और गैस बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई पड़ोसी देशों में ईंधन की कमी और कीमतों में उछाल आया है।
इस दौरान देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत अब तक स्थिर आपूर्ति बनाए रखने में सफल रहा है, लेकिन गैर-जिम्मेदाराना खपत हमें भी मुश्किल में डाल सकती है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया है कि हमारी आपूर्ति बड़े पैमाने पर प्रभावित न हो। लेकिन अगर हम सावधानी नहीं बरतेंगे तो हमें भी कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जिम्मेदारी से तेल और गैस का उपयोग करें।
आयात पर निर्भरता घटाने का आह्वान
इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आयात पर भारत की निर्भरता कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हम खाद्य तेल और ईंधन के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करते हैं। अगर हर घर खाद्य तेल का उपयोग कम कर दे तो यह देशभक्ति का बड़ा कार्य होगा। पीएम मोदी ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक खेती अपनाने, नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग का उपयोग बढ़ाने तथा माल ढुलाई में रेलवे को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने को भी ऊर्जा सुरक्षा की दीर्घकालिक रणनीति बताया।
दूसरी ओर एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र में अस्थिरता बनी रही, तो कच्चे तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। भारत सरकार पहले से ही ऊर्जा संरक्षण, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और टिकाऊ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, ताकि वैश्विक संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम रहे। इसीलिए प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक आम नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि ऊर्जा की बचत करें, जिससे देश को किसी बड़ी समस्या का सामना न करना पड़े।


























































