नई दिल्ली। सनातन धर्म में पूर्णिमा की तिथि बहुत विशेष और पावन मानी जाती है. पूर्णिमा पर स्नान-दान, पूजा-पाठ और व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन चंद्र देव और भगवान विष्णु का पूजन करने से विशेष लाभ मिलता है. पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है. मान्यता है कि पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने से मानसिक तनाव दूर होता है.
यही नहीं कुंडली में मौजूद चंद्र दोष से भी राहत मिलती है. वर्ष भर में 12 पूर्णिमा की तिथियां पड़ती हैं. अधिकमास में 13 पूर्णिमा की तिथियां पड़ती हैं. हर एक माह की पूर्णिमा का अपना महत्व है. ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है. इस तिथि पर वट पूर्णिमा का उपवास भी किया जाता है. इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों के मन में संशय है, लेकिन ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून को मनाई जाने वाली है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को तड़के सुबह 03 बजकर 06 मिनट पर होगी.
इस तिथि का समापन 30 जून को सुबह 05 बजकर 26 मिनट पर होगा.
उदया तिथि के आधार पर 29 जून 2026 को ही ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाएगी. इसी दिन वट पूर्णिमा का उपवास भी किया जाएगा. इस दिं चंद्रोदय का समय शाम को 07 बजकर 16 मिनट रहेगा.
ज्येष्ठ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त 04 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. प्रात: संध्या मुहूर्त 04 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा और 05 बजकर 26 मिनट तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा और 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम को 07 बजकर 22 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त 07 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगा. अमृत काल रात 08 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगा और 10 बजकर 53 मिनट तक रहेगा.
ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपाय
- ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन अन्न-धन का दान करें. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन दान करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है.
- सुहागिन महिलाएं इस दिन वट पूर्णिमा व्रत भी रखती हैं. ऐसे में अगर आप विवाहित हैं, तो व्रत पूर्णिमा का व्रत अवश्य करें. वट वृक्ष की पूजा करें. ऐसा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है.
- इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, केले, बेसन के लड्डू अर्पित करें. ऐसा करने से घर में बरकत बनी रहती है और शुभ फल मिलने लगते हैं. साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य दें.





























































