नई दिल्ली। आम का सीजन चालू है, लेकिन इस दौरान केमिकल से पका आम खाने की गलती मत करना। क्योंकि यह आपकी सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। एफएसएसएआई ने केमिकल और प्राकृतिक रूप से पके आमों को पहचानने का तरीका बताया है।
केमिकल और नेचुरल आम कैसे पहचानें
आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता। जबतक इसका सीजन चलता है, हर कोई इसे खाना चाहता है और फिर अगले सीजन के आने का इंतजार करता है। पीला और मीठा ये फल खाते ही अलग अनुभव की प्राप्ति होती है। लेकिन कभी भी पूरे पीले चटक आम को खरीदने की गलती ना करना, क्योंकि इसके जहरीले केमिकल से पका होने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं। अगर आप ऐसे आम खरीदकर खाते हैं तो यह बिल्कुल अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने केमिकल से पके और नेचुरल तरीके से पके आम की 5-5 पहचान बताई हैं। जिनका ध्यान रखते हुए आप खरीददारी के दौरान अपने शरीर व सेहत के लिए हेल्दी फ्रूट चुन सकते हैं। साथ ही जानेंगे कि इस केमिकल से क्या होता है और किन बीमारी का खतरा रहता है।
जहरीला केमिकल है कैल्शियम कार्बाइड
कुछ लोग सीजन में आम की सप्लाई बढ़ाने के लिए इन्हें जल्दी तोड़ लेते हैं और फिर केमिकल से पकाकर मार्केट में बेच देते हैं। एफएसएसएआई ने बताया आमों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। इस केमिकल से खतरनाक एसिटिलीन गैस निकलती है। कई सारे शोध इस केमिकल को इंसानी शरीर के लिए टॉक्सिक यानी जहरीला मानते हैं।
आर्टिफिशियल और नेचुरल पके आम में अंतर
आम में कैल्शियम कार्बाइड कैसे पहचानें?
- पूरे आम का एक जैसा चटक पीला रंग
- कोई प्राकृतिक महक ना आना
- बाहर से मुलायम और अंदर से सख्त होना
- बेस्वाद या असामान्य स्वाद
- आम के ऊपर सफेद पाउडर के कण
नेचुरल पके आम की 5 पहचान
- अलग-अलग या असामान्य रंग, अक्सर हरे और पीले रंग के पैच
- डंठल के पास मीठी महक
- दबाने पर हल्का मुलायम
- बढ़िया और रसदार स्वाद
- आम के ऊपर प्राकृतिक काले धब्बे
कैल्शियम कार्बाइड क्यों है खतरनाक?
एनसीबीआई पर मौजूद शोध के मुताबिक, फलों को पकाने के लिए जहरीले केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें कैल्शियम कार्बाइड पाउडर भी शामिल है। इसके अंदर आर्सेनिक और अन्य टॉक्सिक व कार्सिनोजेनिक केमिकल्स की अशुद्धियां होती हैं। इसके अलावा, फलों पर प्रीजर्वेटिव, वैक्सिंग एजेंट, डाइट और फ्लेवर एन्हांसर्स का इस्तेमाल भी होता है, जो कैंसर, डायबिटीज व थायरॉइड डिसऑर्डर्स का कारण बन सकते हैं।




























































