नई दिल्ली। फ्रांस में चल रहे G7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने एक बार फिर मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। मिस्र के राष्ट्रपति के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अभी सिर्फ एक समझौता मसौदा है, अंतिम डील नहीं हुई है।
ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिकी शर्तें नहीं मानीं तो फिर से बमबारी की जाएगी। ट्रंप के इस बयान को लेकर दुनियाभर में नई बहस शुरू हो गई है।
ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी
G7 समिट के दौरान ट्रंप ने बेहद सख्त अंदाज में कहा कि अगर ईरान ने “ठीक व्यवहार” नहीं किया तो अमेरिका दोबारा हमला करेगा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़ी तो सीधे उनके सिर पर बम गिराए जाएंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। ऐसे में उनकी भाषा को कूटनीतिक मर्यादा से अलग और काफी आक्रामक माना जा रहा है।
न्यूक्लियर डील पर ओबामा को भी घेरा
ट्रंप ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ हुई न्यूक्लियर डील में नकद रकम देकर समझौता किया था। ट्रंप के मुताबिक उनकी सरकार ने कभी ऐसी नीति नहीं अपनाई। उन्होंने दावा किया कि पैसे देकर समस्या हल करने की कोशिश नाकाम रही और इसी वजह से ईरान लगातार मजबूत होता गया।
खाड़ी देशों के फंड पर भी दी सफाई
हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि खाड़ी देशों की मदद से 300 अरब डॉलर का बड़ा कंस्ट्रक्शन फंड बनाया जा रहा है। ट्रंप ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस तरह की किसी योजना में एक डॉलर भी निवेश नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि खाड़ी देश भी ईरान के भविष्य के रवैये को देखकर ही कोई बड़ा निवेश करने का फैसला करेंगे।
ईरान की सेना को तबाह करने का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और कई रक्षा सिस्टम कमजोर कर दिए गए। ट्रंप के मुताबिक अब ईरान के पास पहले जैसी मिसाइल डिफेंस क्षमता नहीं बची है। हालांकि उनके इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उन्होंने खुद को ईरान के खिलाफ सबसे सख्त अमेरिकी राष्ट्रपति बताया।
तेल की कीमतों और सैन्य कार्रवाई का कनेक्शन
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना की कार्रवाइयों की वजह से वैश्विक तेल बाजार स्थिर बना रहा। उनके मुताबिक अगर अमेरिका सख्त कदम नहीं उठाता तो कच्चे तेल की कीमतें 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती थीं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उनके पहले कार्यकाल में ईरानी कमांडर Qasem Soleimani को मार गिराया गया था। ट्रंप का कहना है कि इसी दबाव की वजह से आज अमेरिका बातचीत में मजबूत स्थिति में है।


























































