नई दिल्ली। ज्योतिष जगत में कभी-कभी एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिलता है। कई बार जब जातक किसी ज्योतिषी के पास अपनी जन्मकुंडली लेकर जाता है, तो उसे राजयोग एवं उसकी अनुकूल ग्रहदशा के बारे में बताया जाता है। यह सुनकर जातक के मन में उम्मीदों का एक नया महल खड़ा हो जाता है, लेकिन हकीकत के धरातल पर जब वह अपने जीवन को देखता है, तो वहां केवल कड़ा संघर्ष, असफलता और मानसिक तनाव ही दिखाई देता है, ऐसा क्यों।
जातक की जन्मकुंडली में तो गजकेसरी योग है, पंचमहापुरुष मालव्य योग जैसे महान राजयोग विद्यमान हैं, उसकी ग्रह-दशा भी अनुकूल है लेकिन फिर भी उसके जीवन में संघर्ष, असफलता और मानसिक तनाव ही दिखाई देता है। आखिर ऐसा क्यों होता है, क्या महर्षि पराशर, भृगु ऋषि और जैमिनी जैसे ऋषियों के ज्योतिष सूत्र असत्य हैं, या फिर ज्योतिष के गणित में कोई बहुत बड़ी कमी रह गई है। आधुनिक समय में किए गए ज्योतिषीय शोध बताते हैं कि ऋषियों के सूत्र कभी असत्य नहीं होते।
राजयोग तभी फलता है जब व्यक्ति उस फल को ग्रहण करने योग्य हो। यह पात्रता कई तत्वों से बनती है, जैसे व्यक्ति का मानसिक विश्वास, उसके संस्कार, उसकी आदतें, उसकी संगति तथा स्वयं को जानने की उत्कंठा। अक्सर ज्योतिषियों के पास ऐसे लोग आते हैं, जिन्हें स्वयं के उपर रत्ती भर भी विश्वास नहीं होता कि वे सफल हो जाएंगे, वे बार-बार ज्योतिषी से एक ही बात को घुमा-फिरा कर पूछते रहते हैं।
अनुभव बताता है कि अगर आप खुद नहीं मानते कि आप सफल हो सकते हैं, तो जन्मपत्री का राजयोग भी फल देने में असमर्थ हो जाता है। इसका कारण है राजयोग के प्रभाव से शुभ परिस्थितियां आती हैं, यानि व्यक्ति के पास अवसर आता है, लेकिन उसका डरा हुआ मन उसे अस्वीकार कर देता है। राजयोग बड़ी ज़िम्मेदारी लाता है, अगर व्यक्ति की आदतें, अनुशासन, सोच उस स्तर की नहीं है, तो राजयोग जन्मपत्री में केवल लिखा रह जाता है।
जीवन में सफलता और जन्मपत्री में राजयोग को घटित होने के लिए कई मानकों की आवश्यकता होती है, इसलिए कहा जाता है कि सफलता अकेले नहीं चलती, सही लोग, सही माहौल का साथ जरूरी है। तो अगली बार किसी ज्योतिषी को जन्मपत्री दिखाने जाएं तो यह समझ लीजिएगा कि जन्मपत्री में लिखा राजयोग भाग्य की गारंटी बिल्कुल भी नहीं है, यह आपके सफल होने की उस संभावना को बताता है, जिसे आप उचित दिशा में कर्म कर पात्रता होने पर प्राप्त कर सकते हैं।
यदि आपकी जन्मकुंडली में राजयोग है और फिर भी आप संघर्ष कर रहे हैं, तो ग्रहों को दोष देना बंद कीजिए, अपनी ऊर्जा को बाहर भटकने देने के बजाय अंतर्मुखी कीजिए, ध्यान, आत्म-निरीक्षण और निःस्वार्थ कर्म के माध्यम से अपनी पात्रता को बढ़ाइए।





























































