भुवनेश्वर। ओडिशा के प्रसिद्ध रेत कलाकार पद्मश्री सुदर्शन पटनायक को रूस में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचर महोत्सव में रूस ग्रैंड सैंड मास्टर कप 2026 से सम्मानित किया गया।इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित होने वाले वाले वह पहले भारतीय सैंड आर्टिस्ट बन गए हैं।
यह सम्मान उन्हें सैंड आर्ट के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और ग्लोबल वार्मिंग विषय पर बनाई गई प्रभावशाली रेत की मूर्ति के लिए प्रदान किया गया।11 जून 2026 से शुरू हुए इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में विशेष जूरी समिति ने सर्वसम्मति से उनके नाम का चयन किया।
लंबे समय से फैला रहे जनजागरूकता
सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय मुद्दों पर अपनी रेत कलाकृतियों के लिए विश्वभर में पहचान बना चुके पटनायक लंबे समय से अपनी कला के माध्यम से जनजागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव का संदेश देते आ रहे हैं।
महोत्सव के उद्घाटन समारोह के दौरान गुरुवार शाम को रूस की जनरल डायरेक्टर अलेना अलेक्जेंड्रोवना ने सरकारी अधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में पटनायक को ग्रैंड सैंड मास्टर कप और पदक प्रदान किया।इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में विभिन्न देशों के 12 प्रमुख सैंड स्कल्प्टरों ने भाग लिया और अपनी-अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों का प्रदर्शन किया।
रेत की मूर्ति पृथ्वी के दो विपरीत स्वरूपों को दर्शाती
पटनायक की पुरस्कार विजेता 3 मीटर ऊंची रेत की मूर्ति पृथ्वी के दो विपरीत स्वरूपों को दर्शाती है। एक ओर पर्यावरणीय क्षरण से प्रभावित सूखी और क्षतिग्रस्त धरती को दिखाया गया है, जबकि दूसरी ओर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से आशा का संदेश दिया गया है।
सर्वसम्मति से सम्मान के लिए चुना
यह कलाकृति कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने, ऑक्सीजन छोड़ने, जल संरक्षण, मृदा अपरदन रोकने और वन्यजीवों के संरक्षण में पेड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है।जूरी समिति ने उनकी कलात्मक उत्कृष्टता, रचनात्मकता और सैंड आर्ट के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए सर्वसम्मति से इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना।
पद्मश्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ओडिशा के रहने वाले हैं और सामाजिक तथा पर्यावरणीय मुद्दों पर सार्थक संदेश देने के लिए सैंड आर्ट को प्रभावी माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।अपनी कला के जरिए वह लगातार लोगों को प्रेरित कर रहे हैं और सतत एवं बेहतर भविष्य के लिए जागरूकता फैला रहे हैं।
























































