नई दिल्ली। वन ब्रेथ, वन स्टेज, वन वर्ल्ड – के थीम के साथ वर्ल्ड योगासन और योगासन भारत के तत्वाधान में पिछले दिनों गुजरात के अमदाबाद में विश्व चैम्पियनशिप का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस चैंपियनशिप ने साबित कर दिया कि हमारे पुरातन विषय योग का पूरे विश्व में तेजी से विस्तार हो रहा है। हजारों सालों से भारत में योग की जो एक समृद्ध परंपरा चली आ रही है, उसके अलग-अलग आसनों जैसे प्रणायाम, ध्यान और समाधि के जरिए इस वर्ल्ड चैंपियनशिप ने सनातन संस्कृति और भारतीय समृद्ध परंपरा को नए युग में प्रतिष्ठित करने का कार्य किया। यही नहीं, इस भव्य आयोजन से भारत ने योग खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा लिया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन के बहाने अब वर्ल्ड योग चैम्पियनशिप ने भारत को विश्व गुरु बनने की दिशा में एक मुहर सी लगा दी है। पहली बार आयोजित की गयी इस विश्व चैम्पियनशिप में 78 देशों के 600 से अधिक खिलाड़ियों का भाग लेना एक बड़ी उपलब्धि है। देश-विदेश के प्रतिभागियों को इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने पर जितना हर्ष और प्रसन्नता की अनुभूति हो रही थी, उतना ही आनंददायक क्षणों का अनुभव कर रहा था विश्व योग जगत। शारीरिक स्थिरता, सुख की अनुभूति, खुशी और सांसों के नियंत्रण के जरिए प्रथम वर्ल्ड योगा चैंपियनशिप की सफलता विश्व योग जगत की सामूहिक उपलब्धि है। इसमें शामिल तमाम लोगों का योग के प्रति गहरा जुड़ाव, उनका समर्पण, सामूहिक प्रयास व उनकी प्रतिबद्धता ने पूरे विश्व योग जगत को एक मंच पर खड़ा कर दिया। यह अतिशयोक्ति नहीं, सच है।
भारत के सॉफ्ट पावर मॉडल का डंका
भारत ने वैश्विक खेल मंच पर योगासन की ऐतिहासिक शुरुआत का उद्घोष किया है। यह चैम्पियनशिप योगासन के विकास की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव है, जो भारत की प्राचीन योग परंपरा को एक प्रतिस्पर्धात्मक वैश्विक खेल के रूप में स्थापित करने तथा अंतरराष्ट्रीय खेल मान्यता की दिशा में उसके मार्ग को सुदृढ़ करने में काफी हद तक सफल रही। नए भारत में भारतीय खेल जगत को नयी पहचान दिलाने को प्रतिबद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चैम्पियनशिप का उद्घाटन कर योगासन खेल की वैश्विक यात्रा में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ा। यही नहीं, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया एवं गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल ने भी योगासन को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों तक पहुंचाने के संकल्प को दोहराया। योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज (अध्यक्ष, वर्ल्ड योगासन), डॉ. जयदीप आर्य (महासचिव, वर्ल्ड योगासन एवं योगासन भारत), उदित सेठ (अध्यक्ष, योगासन भारत) और संजय मालपाणी (पूर्व अध्यक्ष, वर्ल्ड योगासन) जैसे शीर्षस्थ योगज्ञानी ने भारतीय तिरंगा लहराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
योग को बनाया ब्रांड
मेजबान भारत ने 122 सदस्यीय दल उतारा। छह आयु वर्गों में व्यक्तिगत, कलात्मक तथा पारंपरिक समूह स्पर्धाओं में प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया गया। भारत अपनी स्वदेशी विधा का डंका बजाते हुए 102 स्वर्ण सहित कुल 114 पदक जीत शीर्ष पर रहा। भारत और अन्य विदेशी प्रतिस्पर्धियों के बीच भारी अंतर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पदक तालिका में दूसरे स्थान पर रहे जापान के खाते में मात्र 3 स्वर्ण सहित कुल 11 पदक ही आए। हालांकि अच्छी बात यह रही कि भारतीय योग प्रतिभागियों व योगा गुरुओं से विदेशी प्रतिभागियों को काफी कुछ सीखने का मौका मिला।
ज्यादातर विदेशी प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि आसन सीखना एक बात है और सांसों के नियंत्रण के जरिए उस पोस्चर को स्थिर बनाए रखना बेहद मुश्किल है, जो वे भारतीय खिलाड़ियों व प्रशिक्षकों से सीख कर वापस स्वदेश लौट रहे हैं। उनका मानना था – समृद्ध विरासत और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम है भारत। भारत को योगभूमि और आध्यात्मिक भूमि के रूप में दर्शाता विश्व चैंपियनशिप के थीम सांग में बताया गया – योगासन है अनुपम, एक धड़कन, एक स्पंदन, एक चेतना, एक वंदन, समय से परे, धर्म से परे, ना आशा न सीमा, बस एक उर्जा, सबके लिए एक अनुभव।
खेल और वेलनेस की डबल डोज
वर्ल्ड हैरीटेज सिटी का दर्जा प्राप्त अहमदाबाद में विश्व चैंपियनशिप के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बताया कि वर्ल्ड योगा डे के मौके पर विश्व के अलग-अलग देशों में योग से जुड़े आयोजन होंगे। भारत के ऐतिहासिक शहर कोलकाता में मनाया जाएगा। उन्होंने इस खेल को प्रोत्साहित करते हुए कहा – विश्व चैंपियनशिप खेल और वेलनेस की डबल डोज लेकर आयी है। हम प्राचीन भारतीय परंपरा को मानवता के स्वास्थ्य और सामूहिक कल्याण से जोड़ना चाहते थे।
आज करोड़ों लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना चुके हैं। ध्यान, प्रणायाम उनकी जीवन शैली का हिस्सा बन रहा है। हर जीवन परंपरा समय के साथ नए चरण में प्रवेश करती है। विश्व चैंपियनशिप इसी चरण का शुभारंभ है। इसके माध्यम से योगा को एक प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में नयी पहचान मिलेगी। ओलंपिक हो अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में योगा को शामिल भी किया जा सकता है।
“आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि विश्व के विभिन्न देशों के लाखों युवा योगासन को खेल तथा आत्म-विकास के मार्ग के रूप में अपना रहे हैं। यह प्रतियोगिता केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि आत्म-अन्वेषण, आत्म-अनुशासन और आत्म-सुधार की यात्रा भी है।”
वैश्विक लोकप्रियता का प्रमाण – मांडविया
इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “जब पहला फुटबॉल विश्व कप आयोजित हुआ था, तब केवल 13 देशों ने भाग लिया था। आज प्रथम विश्व योगासन चैम्पियनशिप में विश्व के 78 देशों की उपस्थिति योगासन की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता का प्रमाण है।” उन्होंने आगे कहा – “जब दुनिया शक्ति की बात करती है, तब भारत संतुलन की बात करता है। योगासन के माध्यम से भारत संतुलन, अनुशासन और समग्र विकास के संदेश को खेल के रूप में पूरे विश्व तक पहुंचा रहा है।”
बाहरी दुनिया से आंतरिक चेतना की यात्रा
वर्ल्ड योगासन एवं योगासन भारत के महासचिव डॉ. जयदीप आर्य ने कहा, “हमें केवल अपने आसनों में ही नहीं, बल्कि स्वयं पर भी महारत हासिल करनी होगी — यही योग है। योग बाहरी दुनिया से आंतरिक चेतना की यात्रा है। योगासन खेल के माध्यम से हम ऐसा मंच तैयार कर रहे हैं जहाँ खिलाड़ी केवल शारीरिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि संतुलन, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता का भी प्रदर्शन कर सकें। हमें अपने शरीर के साथ-साथ अपने मन को भी हर परिस्थिति में संतुलित और अनुकूल बनाए रखने का प्रशिक्षण देना होगा।”
इलेक्ट्रॉनिक मार्किंग सिस्टम
पिछले 6 साल से निरंतर खेलो इंडिया गेम्स व नेशनल गेम्स में योगा को अपनाया गया। एक लंबा सफर तय करते हुए योगा आज प्रथम विश्व चैंपियनशिप के आयोजन तक पहुंच गया। एक विस्तृत इलेक्ट्रॉनिक मार्किंग सिस्टम के तहत योगा स्पर्धाओं की स्कोरिंग की जाती है। 5 जज उनका पारंपरिक आसन देखने को बैठते हैं जो पूरी तरह से पारदर्शी है। उन जजों में से उच्चतम व न्यूनतम स्कोर को हटा दिया जाता है और हर जज का स्कोर उसी क्षण विशाल स्क्रीन पर अंकित हो जाता है।
शेष तीन जजों के स्कोर का औसत निकालकर प्रतियोगी को अंक दिए जाते हैं। हालांकि इसमें महत्वपूर्ण है कि 150 में से करीबन 120 अंक प्रतियोगी के पारंपरिक आसन को ही दिया जाता है, बाकी बचे 30 अंक उनके आर्टिस्टिक व रिद्मिक परफॉरमेंस व टाइमिंग को दिया जाता है। सारे जजों के पैनल एकसाथ बैठते हैं तो किसी भी तरह पक्षपातपूर्ण निर्णयों की कोई गुंजाईश नहीं रह जाती है।


























































