नई दिल्ली। सनातन धर्म में नवरात्रों का विशेष महत्व है। इनमें गुप्त नवरात्रि तांत्रिक साधना और गहन आध्यात्मिक उन्नति के लिए जानी जाती है। वर्ष में दो गुप्त नवरात्र होते हैं, जिनमें आषाढ़ माह वाला नवरात्र विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा के साथ नौ दुर्गा की आराधना की जाती है, जो साधक को आध्यात्मिक शक्ति और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन प्रदान करती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की तिथि
आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026 में 14 जुलाई 2026 को दोपहर से शुरू हो रहा है। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई दोपहर से 15 जुलाई सुबह तक रहेगी। इसलिए 15 जुलाई 2026 को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त होगा और इसी दिन से नवरात्र का औपचारिक आरंभ माना जाएगा। यह पर्व 23 जुलाई 2026 को नवमी तिथि पर समाप्त होगा।
गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि को सामान्य नवरात्रि से अधिक गहन और रहस्यमय माना जाता है। इस दौरान साधक देवी के उन स्वरूपों की उपासना करते हैं, जो आम पूजा में कम किए जाते हैं। आषाढ़ गुप्त नवरात्र में विशेष रूप से दस महाविद्याओं की साधना का विधान है। मान्यता है कि इस अवधि में की गई साधना शीघ्र फल देती है और साधक को आध्यात्मिक शक्ति, बाधा निवारण और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
दृक पंचांग के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को घटस्थापना का सबसे उत्तम समय सुबह 06:01 बजे से 10:17 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजा और कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:32 से 05:16 तक
- अमृत काल: शाम 04:00 से 05:27 तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 से 03:25 तक
इन मुहूर्तों में पूजा करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पूजन की विधि
नवरात्रि की पूजा शुरू करने से पहले पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। सुबह में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घटस्थापना के समय मां दुर्गा का ध्यान करें और कलश स्थापित करें। दीपक जलाएं, यदि संभव हो, तो अखंड ज्योति प्रज्वलित रखें। मां को पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, फल और मिठाई अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी मंत्रों का नियमित जाप करें। नौ दिनों तक सात्विक भोजन ग्रहण करें और नित्य आरती करें। अंतिम दिन नवमी पर हवन और पूर्णाहुति कर प्रसाद वितरित करें।
साधना के लाभ
आषाढ़ गुप्त नवरात्र में सच्ची श्रद्धा और नियम से साधना करने वाले साधक को देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह अवधि बाधाओं को दूर करने, आर्थिक उन्नति, स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए बेहद अनुकूल है। जो लोग तांत्रिक साधना में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह समय और भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 माता की उपासना के लिए एक शक्तिशाली अवसर है। सच्ची श्रद्धा और नियमित साधना से मां दुर्गा की कृपा जरूर प्राप्त होगी। इस समय सकारात्मक विचार रखें और आत्मशुद्धि पर ध्यान दें।



























































