नई दिल्ली। आरबीआई ने लीड बैंक योजना के लिए नए नियम जारी किए हैं. इससे बैंकिंग सिस्टम को मजबूती मिलेगी. साथ ही, किसानों, एमएसएमई तथा अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक लोन की पहुंच बढ़ाई जा सकेगी. नए नियमों के तहत हर जिले में लीड बैंक की भूमिका को मजबूत किया जाएगा. साथ ही ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर कॉमेटी बैंकिंग और लोन योजनाओं की समीक्षा करेंगीं. इससे आपको क्या-क्या फायदा मिलेगा, ये बताते हैं.
आरबीआई ने लीड बैंक योजना (Lead Bank Scheme) के लिए नए नियम जारी किए हैं. इनका मकसद जिला के लेवल पर बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाना तथा किसानों, माइक्रो, स्मॉल एवं मिडियम बिजनेस (MSME) और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक लोन की पहुंच को बेहतर बनाना है. आरबीआई का मानना है कि इन बदलावों से बैंकिंग सर्विसेस ज्यादा प्रभावी होंगी और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी वित्तीय सुविधाओं का फायदा आसानी से मिल सकेगा.
लीड बैंक योजना की शुरुआत साल 1969 में की गई थी. इस योजना के तहत हर जिले में एक प्रमुख बैंक को जिम्मेदारी दी जाती है, जो उस जिले में बैंकिंग और लोन डिस्ट्रीबुशन से जुड़े प्रोसेस के समन्वय का काम करता है. समय के साथ बैंकिंग सेक्टर में आए बदलावों को देखते हुए आरबीआई ने इस योजना की समीक्षा की और अब नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
मजबूत होगा बैंकिंग सिस्टम
नई गाइडलाइंस के तहत जिला स्तर पर बैंकों, सरकारी विभागों और विकास एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. हर जिले में नियुक्त लीड बैंक स्थानीय जरूरतों के अनुसार बैंकिंग सेवाओं और लोन योजनाओं को आगे बढ़ाने का काम करेगा. आरबीआई का मानना है कि बेहतर समन्वय से बैंकिंग सुविधाएं अधिक लोगों तक पहुंचेंगी और जरूरतमंद सेक्टर्स को समय पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी. इससे फाइनेंशियल इन्क्लूजन को भी बढ़ावा मिलेगा.
क्या है नए नियम?
नए नियमों के अनुसार हर लीड बैंक को एक समर्पित लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM) नियुक्त करना होगा. यह अधिकारी जिला स्तर पर योजना के निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगा. एलडीएम बैंक शाखाओं, स्थानीय प्रशासन और अलग-अलग सरकारी योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करेगा. इससे किसानों, छोटे व्यापारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को लोन प्राप्त करने में आने वाली समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा. साथ ही बैंकिंग सेवाओं की निगरानी और समीक्षा भी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी.
तीन लेवल पर होगी निगरानी
आरबीआई ने योजना को प्रभावी बनाने के लिए तीन स्तरीय समिति व्यवस्था पर भी जोर दिया है. इसमें ब्लॉक स्तर पर बैंकर्स समिति, जिला स्तर पर जिला परामर्श समिति और राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति काम करेगी.ये समितियां जिला लोन योजनाओं की तैयारी, उनकी समीक्षा और बैंकिंग से जुड़ी चुनौतियों के समाधान का काम करेंगी. इससे अलग-अलग सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सकेगा.
किसानों और एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा फायदा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा किसानों, छोटे उद्यमियों और एमएसएमई क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है. बेहतर लोन उपलब्धता से कृषि गतिविधियों, छोटे उद्योगों और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा. इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. आरबीआई का फोकस केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को लोन, बीमा और अन्य वित्तीय सर्विसेस से भी जोड़ना है.



























































