नई दिल्ली। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। ओडिशा सरकार ने विवादित कोटिया क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने की अधिसूचना जारी करने पर आंध्र प्रदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। ओडिशा का आरोप है कि आंध्र प्रदेश ने अदालत के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश का उल्लंघन किया है।
दिलचस्प बात यह है कि ओडिशा में भाजपा की सरकार है, जबकि आंध्र प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सहयोगी टीडीपी सत्ता में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि राजनीतिक सहयोग के बावजूद दोनों राज्यों के बीच यह विवाद क्यों नहीं सुलझ पा रहा है।
क्या है कोटिया का पूरा विवाद?
कोटिया क्षेत्र ओडिशा के कोरापुट जिले के पोट्टांगी ब्लॉक में स्थित है। यहां के गांवों पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों अपना दावा करते हैं। ओडिशा के मुताबिक, कोटिया ग्राम पंचायत के सभी 28 गांव उसके क्षेत्र में आते हैं, जबकि आंध्र प्रदेश इनमें से 21 गांवों पर अपना अधिकार जताता है।
विवाद की ताजा वजह आंध्र प्रदेश की ओर से 10 अक्टूबर 2026 को जारी चुनाव अधिसूचना है। इसके तहत विवादित क्षेत्र में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।
ओडिशा सरकार का कहना है कि जब मामला अदालत में विचाराधीन है और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश लागू है, तो आंध्र प्रदेश विवादित गांवों में चुनाव कैसे करा सकता है? इसी आधार पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
सुप्रीम कोर्ट में पहले कब पहुंचा था मामला?
कोटिया सीमा विवाद कई दशक पुराना है। ओडिशा ने 1968 में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वर्ष 2006 में अदालत ने दोनों राज्यों को विवादित क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था।
इससे पहले फरवरी 2021 में भी आंध्र प्रदेश ने विवादित क्षेत्र के कुछ गांवों में पंचायत चुनाव कराए थे। इसके बाद ओडिशा ने अदालत में अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी।
अब 2026 में चुनावी प्रक्रिया दोबारा शुरू होने पर ओडिशा ने नई याचिका दायर की है। राज्य सरकार का आरोप है कि आंध्र प्रदेश की कार्रवाई अदालत के आदेश के विपरीत है। हालांकि, अवमानना का आरोप लगने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उल्लंघन साबित मान लिया है।
किन गांवों में होने हैं चुनाव?
ताजा विवाद में फागुनासिनेरी, गांजेइपादर और फाटुसिनेरी जैसे गांवों के नाम सामने आए हैं। विवादित क्षेत्र से जुड़ी एमपीटीसी सीटों के लिए तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। इन सीटों पर 3 नवंबर को मतदान प्रस्तावित है। सरपंच और वार्ड सदस्य पदों के चुनाव 26 नवंबर, 29 नवंबर और 2 दिसंबर को अलग-अलग चरणों में कराने का कार्यक्रम भी सामने आया है।
हालांकि, कोरापुट की सब-कलेक्टर फाबी रशीद ने कहा कि क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्हें विवादित गांवों में चुनाव संबंधी गतिविधियां नहीं दिखीं। उनके मुताबिक, ओडिशा की सीमा के भीतर मतदान केंद्र स्थापित नहीं किया गया था।
भाजपा और एनडीए की सरकारें, फिर भी विवाद क्यों?
ओडिशा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार है, जबकि आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सरकार सत्ता में है। टीडीपी केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की अहम सहयोगी है। इस राजनीतिक समीकरण के बीच विपक्ष ने ओडिशा सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं।
बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए पूछा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान कोटिया विवाद के स्थायी समाधान का वादा करने वाली पार्टी अब क्या कर रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र में एनडीए की सरकार के लिए टीडीपी के समर्थन की राजनीतिक जरूरत इस मामले में ओडिशा के रुख को प्रभावित कर रही है।
वहीं, ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि राज्य सरकार अपने क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने विवाद के समाधान में पिछली बीजद सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
अब क्या कह रही है ओडिशा सरकार?
ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 10 अक्टूबर को ओडिशा के कोटिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव कराने संबंधी अधिसूचना जारी किए जाने के बाद कोरापुट के जिलाधिकारी के माध्यम से शीर्ष अदालत में यह याचिका दायर की गई। पुजारी ने संवाददाताओं से कहा, ”मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मंजूरी मिलने के बाद हमने शीर्ष अदालत में अवमानना याचिका दायर की है।”
पुजारी ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने विवादित क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने की अधिसूचना जारी करके न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार ने आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया है। याचिका में राज्य के निर्वाचन आयुक्त, मुख्य सचिव, संबंधित जिले के जिलाधिकारी और चुनाव प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों को भी पक्षकार बनाया गया है। मंत्री ने कहा, ”हम उच्चतम न्यायालय से अनुरोध करेंगे कि वह आंध्र प्रदेश सरकार को भविष्य में इस तरह की गतिविधियां नहीं करने का निर्देश दे।” पुजारी ने कहा कि कोटिया ओडिशा का अभिन्न अंग है और राज्य अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक कदम उठा रहा है।






















































