नई दिल्ली। पिछले कुछ एथेनॉल को लेकर काफी बवाल मचा था और कई लोगों का मानना था की इससे गाड़ियां खराब हो रही हैं. लेकिन अब E20 के सफलता के बाद केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए E100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. सरकार के इस फैसले से अब देश में 100% एथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियों के निर्माण और बिक्री का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
बता दें कि अब देश भर के करोड़ों कार मालिकों के मन में अपनी मौजूदा गाड़ियों की सेफ्टी को लेकर सवाल उठने लगे हैं. लोग सोच रहे हैं कि क्या उन्हें अपनी कारों के इंजन में कोई बदलाव कराना होगा या पेट्रोल पंप पर फ्यूल भरवाते वक्त कोई दिक्कत आएगी. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि आम वाहन चालकों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. चलिए जानते हैं कि इस नए नियम से 15 साल पुरानी, 10 साल पुरानी और 2026 में लॉन्च हुई नई गाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा.
E100 आखिर है क्या
एथेनॉल एक तरह का फ्यूल है जो गन्ने, मक्का और अनाज से बनता है. अभी देश के पेट्रोल पंपों पर जो पेट्रोल मिलता है उसमें 20 फीसदी एथेनॉल मिला होता है. इसे E20 कहते हैं. E85 में 85 फीसदी एथेनॉल होता है. वहीं E100 में लगभग पूरा का पूरा एथेनॉल होता है.
क्या पड़ेगा असर?
जानकारी दें कि अगर आपके पास 15 साल या उससे पुरानी पेट्रोल कार है तो आपको बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है. क्योंकि ये गाड़ियां पूरी तरह से शुद्ध और पेट्रोल पर चलने के लिए ही डिजाइन की गई थीं. इन गाड़ियों के इंजन, फ्यूल इंजेक्टर, रबर पाइप और फ्यूल टैंक एथेनॉल मिश्रण को झेलने में काबिल नहीं होते हैं. यदि ऐसी पुरानी कार में गलती से भी E100 या अधिक एथेनॉल वाला ईंधन डाल दिया जाए तो फ्यूल पाइप गल सकते हैं और इंजन पार्ट्स को भारी नुकसान पहुंच सकता है.
क्या हैं निर्देश?
वहीं 10 साल पुरानी गाड़ियों को भी पारंपरिक पेट्रोल के हिसाब से ही तैयार किया गया था. हालांकि इनके इंजन 15 साल पुरानी कारों के मुकाबले थोड़े अधिक रिफाइंड हैं. फिर भी ये केवल 5% से 10% एथेनॉल मिश्रण को ही आसानी से सहन कर सकते हैं. 10 साल पुरानी कार में भी E100 फ्लेक्स-फ्यूल का इस्तेमाल सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता.
यदि आप इनमें बहुत ज्यादा एथेनॉल मिश्रित ईंधन डालेंगे तो कार के माइलेज में गिरावट आ सकती है और समय के साथ इंजन में जंग या लीकेज की दिक्कत आ सकती हैं. इसलिए 10 साल पुरानी कार चलाने वालों को भी अपनी गाड़ी के फ्यूल सिस्टम में बिना किसी आधिकारिक किट के E100 का उपयोग नहीं करना चाहिए.
मौजूदा कारों पर क्या होगा असर?
जानकारी दें दे कि साल 2026 या हाल के सालों में लॉन्च हुई ज्यादातर नई गाड़ियां पहले से ही E20 कम्प्लायंट इंजन के साथ आ रही हैं. लेकिन ध्यान रहे कि E20 रेडी कारें भी पूरी तरह से E100 पर नहीं चल सकती हैं. सरकार की नई अधिसूचना का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 2026 में खरीदी गई सामान्य कारों में अब E100 डालना अनिवार्य है या वे इसके लिए फिट हैं.
2026 की सामान्य E20 कारों को भी अपने नियमित पेट्रोल पर ही चलना होगा. E100 फ्यूल का उपयोग केवल उन्हीं विशेष फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में किया जा सकेगा. जिन्हें ऑटो कंपनियां खास तौर पर E100 सर्टिफिकेशन के साथ निर्मित और प्रमाणित करके बाजार में उतारेंगी.
कब से लागू
नोटिफिकेशन के मुताबिक ये नियम सरकारी राजपत्र में छपने की तारीख से लागू हो जाएंगे. इस बदलाव का ड्राफ्ट 27 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था और लोगों से सुझाव मांगे गए थे. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. एथेनॉल देश में ही बनता है. देश ने 2025 में पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पूरा कर लिया था और अब सरकार महंगे तेल आयात को और घटाना चाहती है.
मार्च 2026 तक देश में करीब 20 अरब लीटर एथेनॉल बन रहा था और E100 गाड़ियों से इसकी खपत बढ़ने की उम्मीद है. इससे किसानों को भी फायदा मिल सकता है क्योंकि एथेनॉल गन्ने और अनाज से बनता है.






















































