नई दिल्ली। करीब ₹20,000 करोड़ का EC-15 एक्सप्रेसवे जंगल, पहाड़ और समंदर को जोड़ते हुए तीन राज्यों की किस्मत बदलने की तैयारी में है. रायपुर से विशाखापट्टनम तक बनने वाला यह 464-465 किलोमीटर लंबा छह लेन का कॉरिडोर छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से होकर गुजरेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा विजाग पोर्ट तक माल पहुंचाने में मिल सकता है. अभी इस सफर में 12 से 14 घंटे लगते हैं. कॉरिडोर चालू होने पर समय घटकर करीब 5 से 7 घंटे रह सकता है. जानिए इस सड़क में कौन सी दो सुरंगें बन रही हैं और इससे कारोबार, पर्यटन और रोजगार को कैसे फायदा मिलने की उम्मीद है.
रायपुर से निकलने के बाद एक सड़क छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और ओडिशा के पहाड़ी रास्तों से गुजरती है. फिर यही सड़क आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके तक पहुंचती है. रास्ते में कहीं खनिजों से भरे इलाके हैं तो कहीं छोटे शहर और आदिवासी बहुल गांव. यह सिर्फ एक सड़क का सफर नहीं है. करीब ₹20,000 करोड़ की लागत वाला EC-15 यानी रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर तीन राज्यों की तस्वीर बदलने की तैयारी में है. जंगल, पहाड़ और समंदर को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे मध्य भारत को सीधे पूर्वी तट से जोड़ेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा कारोबार और माल ढुलाई को मिल सकता है.
करीब 464 से 465 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का नया मार्ग छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से होकर गुजरेगा. इसकी सबसे अहम कड़ी विशाखापट्टनम का बंदरगाह है. यहां तक माल पहुंचाने में अभी काफी समय लगता है. नए कॉरिडोर से रायपुर और विशाखापट्टनम के बीच सफर 12 से 14 घंटे के बजाय करीब 5 से 7 घंटे में पूरा होने का अनुमान है. यानी कारोबारियों का समय बचेगा और माल ढुलाई की लागत भी घट सकती है. भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह मार्ग इन तीनों राज्यों के लिए सिर्फ बेहतर सड़क नहीं बल्कि व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोलने की उम्मीद है.






















































