नई दिल्ली। भारत में सदियों पहले हुंडी के जरिए एक व्यक्ति दूर बैठे दूसरे व्यक्ति तक रकम पहुंचाता था. धीरे-धीरे बैंकिंग सिस्टम आया. बैंक जाकर पैसे जमा और निकालने की व्यवस्था आई. बाद में ये डेवलप होकर कार्ड स्कैनिंग, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग तक पहुंचा. साल 2016 में आए UPI ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को पूरी तरह से बदल दिया.
जेब में बटुआ रखने वाले लोग अब सिर्फ मोबाइल उठाकर लाखों-करोड़ों रुपये का पेमेंट सिस्टम चलाने लगे हैं. न बैंक जाने की जरूरत, न बैंक खाता नंबर याद रखने का झंझट. बस क्यूआर कोड स्कैन करते ही चंद सेकेंड में रकम एक से दूसरे के खाते में पहुंच जाता है. इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि एक पूरा इकोसिस्टम काम करता है. आपको बस क्लिक, स्वाइप, बीप के साथ पैसा ‘प्राप्त हुआ’ की आवाज सुनाई देती है, लेकिन एक पेमेंट के लिए सेकेंडभर के भीतर बहुत विशाल नेटवर्क काम करता है.
UPI पेमेंट को समझने से पहले समझिए UPI ID, QR कोड क्या है ?
QR Code एक डिजिटल कोड होता है, जिसमें रिसीवर की सारी जानकारी छिपी होती है, नाम, फोन नंबर .यूपीआई आई, बैंक अकाउंट, कई बार अमाउंट डिटेल सब दर्ज होता है, जिसे फोन की स्क्रीन पर स्कैन करते ही रिसीवर की पूपी डिटेल, नाम और कई बार अमाउंट भी दिखने लगता है.
UPI ID क्या है और कैसे बनाते हैं?
UPI ID, वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) है. ये बैंक अकाउंट नहीं होता, बल्कि बैंक खाते तक डिजिटल पेमेंट को पहुंचाने का रास्ता है. आम तौर पर यह “yourname@bankname” जैसा दिखता है . यूपीआई पेमेंट में बैंक खाते की जगह आप UPI IDs से लेन-देन को सरल और सुरक्षित बनाते हैं. UPI ID बनाने के लिए
- पेमेंट ऐप(भीम, Paytm, Gpay,) ऐप डाउनलोड करें
- मोबाइल नंबर डाले
- अपना बैंक चुनें और बैंक अकाउंट लिंक करें.
- 4 या 6 अंकों का पिन (PIN) सेट करें.
कैसे काम करता है UPI का पूरा सिस्टम ?
आपके एक UPI पेमेंट के पीछे बैंक, NPCI, सिक्योर सर्वर्स, इंक्रिक्शन, मोबाइल नेटवर्क, रियल टाइम राउटिंग की पूरी एक अदृश्य दुनिया काम करती है. यूपीआई पेमेंट को पूरा करने के लिए सबसे पहले पेमेंट ऐप की जरूरत होती है. मोबाइल फोन में मौजूद Paytm, PhonePe, GooglePe, Bhim , अमेजन पे जैसे ऐप्स फ्रंट डोर की तरह काम करते हैं, जो आपके फोन नंबर की मदद से आपके बैंक खाते से लिंक होते हैं. यानी पैसा आपने मोबाइल फोन में नहीं, बल्कि आपके खाते में होता है. पेमेंट का काम सिर्फ पेमेंट के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने, पिन डालते और ट्रांजैक्शन पूरा होने का स्टेटस पाने के लिए होता है.
- स्टेप 1: जब आप दुकान में QR कोड स्कैन करते हैं, आपके पेमेंट ऐप का कैमरा उस क्यूआर कोड के पैटर्न को रीड Text डेटा में कंवर्ट करता है.
- स्टेप 2: QR कोड स्कैन करने के बाद आप रिसीवर का नाम और अमाउंट कंफर्म करते हैं और अपना UPI PIN डालते हैं.
- स्टेप 3: यूपीआई पिन डालते ही आपकी परमिशन इंक्रीप्टेड फॉर्म में पेमेंट ऐप आपके बैंक को भेज देता है.
- स्टेप 4: बैंकएंड में आपका पेमेंट ऐप ट्रांजैक्शन रिक्वेट बनाता है, जिसमें पमेंट करने वाले, पेमेंट रिसीवर, अमाउंट, यूपीआई आईडी, ट्रांजैक्शन रेफरेंस, डिवाइस डिटेल और सिक्योरिटी डेटा बैंक के होते हुए NPCI को भेजा जाता है.
- स्टेप 5: NPCI पूरे UPI इकोसिस्टम में ट्रैफिक कंट्रोलर की तरह काम करता है, सब चेक करने के बाद वो पेमेंट को आपके बैंक से रिसीवर के बैंक तक राउट करता है.
- स्टेप 6: आपका बैंक बैंक बैलेंस, बैंक एक्टिव है या नहीं, यूपीआई पिन सही है या नहीं, डेटी लिमिट क्रॉस तो नहीं हुई या कोई फ्रॉड सिग्नल तो नहीं? अगर सारी डिटेल सही है तो बैंक आपके अकाउंट से पैसे डेबिट को अप्रूबल दे देता है और रिसीवर बैंक को क्रेडिट इंस्ट्रक्शन भेजता है.
- स्टेप 7: अगर कोई कंडीशन फेल हो जाती है, तो पेमेंट डिक्लाइन हो जाती है. अगर सारी डिटेल सही है, तो NPCI रिसीवर बैंक को मैसेज भेजता है और अमाउंट में पैसा क्रेडिट दिखने लगता है.
- स्टेप 8: UPI का पूरा सिस्टम डिजिटल लेजर एंट्रीज से होता है, आपके बैंक अकाउंट में डेबिट एंट्री बनती है और रिसीवर के बैंक अकाउंट में क्रेडिट एंट्री होती है.
- स्टेप 9: आपके लिए कुछ सेकेंड में यूपीआई पेमेंट सक्सेसफुल हो जाता है, लेकिन बैंक के बीच फाइनल मनी एडजस्टमेंट बैंक एंड में शिड्यूल सेटलमेंट साइकिल पर होता है.
UPI पेमेंट इतना फास्ट क्यों होता है ?
इधर स्कैन किया और उधर पैसा रिसीवर के अकाउंट में क्रेडिट हो जाता है. पूरा प्रोसेस कुछ सेकेंड में पूरा होता है. इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह स्टैंडर्डाइज्ड मैसेजिंग, इंस्टेंट बैंक कनेक्टिलविटी, स्ट्रेलाइज्ड स्विचिंग, सिक्योर एपीआई और ऑटोमेशन है. पुराने बैंकिंग सिस्टम में मैन्युअल स्टेप्स या बैच प्रोसेसिंग ज्यादा होती थी, लेकिन UPI रियल टाइम इंस्ट्रक्शन पर काम करता है.
UPI फ्री, तो बैंक और पेमेंट कंपनी पैसा कैसे कमाती है ?
UPI ट्रांजैक्शन में जीरो मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) है, यानी UPI आम यूजर्स के लिए फ्री है, कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगता है, लेकिन यूपीआई का इन्फ्रास्ट्रक्चर फ्री में नहीं चलता. बैंक, ऐप्स, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स, मर्चेंट, नेटवर्क को सर्वर्स, सिक्योरिटी, सपोर्ट के लिए पैसे खर्च करने होते हैं. RBI 2022 Discussion Paper के मुताबिक 100 रुपये से यूपीआई पेमेंट पर 0.25 रुपये यानी 25 पैसे का इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट आता है.
25 पैसे का ब्रेकअप
- 10 पैसा–पेमेंट करने वाले बैंक का खर्च
- 6 पैसा PSP लेयर
- 7 पैसा: मर्चेंट साइड बैंक ऐप लेयर
- 2 पैसा – NPCI कॉस्ट

























































