नई दिल्ली: UPI पेमेंट को लेकर इन दिनों नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दरअसल, सरकार डिजिटल पेमेंट से जुड़े कानूनी ढांचे में बदलाव पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी तक यूपीआई ट्रांजैक्शन पर किसी भी तरह का शुल्क लागू नहीं किया गया है। प्रस्तावित बदलाव के तहत भविष्य में सरकार यह तय कर सकेगी कि किन डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को ट्रांजैक्शन चार्ज से छूट मिलेगी।
सर्वें में क्या कहा लोगों ने
इसी बीच मंगलवार को जारी लोकलसर्कल्स (LocalCircles) के एक सर्वे में, जिसमें भारत के 322 ज़िलों से 45,000 से ज़्यादा लोगों की राय ली गई। सर्वे में यह पाया गया कि अगर बड़े मर्चेंट्स पर MDR लगाया जाता है, तो 53% लोग UPI का इस्तेमाल छोड़ देंगे। इनमें से 27% लोगों ने कहा कि वे क्रेडिट कार्ड, 14% डेबिट कार्ड और 12% बैंक ट्रांसफ़र या कैश का इस्तेमाल करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल चर्चा केवल बड़े व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 या 3,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान पर MDR लगाने की संभावना को लेकर है। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा या अंतिम फैसला नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में बड़े मूल्य के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाया जाता है, तो कुछ उपभोक्ता वैकल्पिक भुगतान माध्यमों की ओर रुख कर सकते हैं। वहीं, छोटे दुकानदारों और सामान्य यूपीआई लेनदेन पर फिलहाल किसी बदलाव का प्रस्ताव सामने नहीं आया है।
फिलहाल स्थिति क्या है?
अभी सभी यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त हैं। सरकार ने MDR लागू करने का कोई निर्णय नहीं लिया है। फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित कानूनी बदलाव पर चल रही चर्चा है और अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।

























































