नई दिल्ली। भारतीय नौसेना लगातार अपनी ताकत बढ़ा रही है. एक से बढ़कर एक समंदर के शिकारी नेवी में शामिल किए जा रहे हैं. वहीं, हिंद महासागर, अरब सागर में नेवी ने गश्त और तेज की है. इस बीच, दूसरा स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट जहाज ‘निपुण’ नेवी के बेड़े में शामिल होने जा रहा है. ‘निपुण’ को खास तौर पर गहरे समुद्र में गोताखोरी और पानी के नीचे होने वाले मिशन को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है. जहां सामान्य जहाज समुद्र की सतह पर काम करते हैं, वहीं ‘निपुण’ की भूमिका समंदर की गहराइयों तक जाती है. इसमें एडवांस डाइविंग सिस्टम लगाए गए हैं.
इनके जरिए मुश्किल समुद्री परिस्थितियों में लंबे समय तक गोताखोरों को मदद दी जा सकती है. पानी के नीचे किसी चीज की जांच हो या खतरनाक अभियान, ‘निपुण’ इसके लिए भी तैयार रहेगा. इसको 31 अगस्त को नौसेना में शामिल किया जाएगा. ‘निपुण’ भारतीय नौसेना की पनडुब्बी बचाव क्षमता को भी मजबूत करेगा. किसी पनडुब्बी के समुद्र की गहराई में संकट में फंसने की स्थिति में ऐसे स्पेशल जहाज बेहद अहम होते हैं.
‘निपुण’ गोताखोरों और पानी के नीचे होने वाले बचाव अभियानों को जरूरी सहायता दे सकेगा. पोत में गोताखोरी, पानी के नीचे दखतअंदाजी और डॉक्टरी सहायता के लिए खास सुविधाएं भी हैं. मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में होने वाले समारोह में ‘निपुण’ को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनाया जाएगा. यह निस्तार कैटेगरी का दूसरा डाइविंग सपोर्ट जहाज है.
आधुनिक सिस्टम से लैस है निपुण
नेवी के मुताबिक, ‘निपुण’ में एडवांस नेगिवेशन और शिप मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं. इसमें सटीक स्थिति बनाए रखने की क्षमता भी है.
इसका फायदा पानी के नीचे जटिल अभियानों के दौरान मिलेगा. जहाज समुद्र में अपनी स्थिति को कंट्रोल रखते हुए गोताखोरों को लगातार मदद दे सकेगा.
‘निपुण’ का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है. इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम ने बनाया है.
यह भारत की रक्षा जहाज निर्माण क्षमता के लिए अहम कामयाबी है.जहाज का निर्माण देश में हुआ है और इसमें बेहद एडवांस स्पेशल सिस्टम शामिल किए गए हैं.
व्यापक उपकरण स्थापना और परीक्षणों के बाद ‘निपुण’ को 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था. अब 31 अगस्त को इसके ऑपरेशनल सफर की औपचारिक शुरुआत होगी. ‘निपुण’ के पोत-चिह्न में एक व्हेल और आधुनिक गोताखोरी हेलमेट को प्रमुखता दी गई है. व्हेल समुद्र की अत्यधिक गहराई तक जाने और लंबे समय तक पानी के भीतर रहने के लिए जानी जाती है. इसलिए यह धैर्य, सहनशीलता और लंबे अभियानों का प्रतीक है. वहीं, गोताखोरी हेलमेट इस पोत के सबसे महत्वपूर्ण साथी यानी गोताखोर को दर्शाता है.
यह आधुनिक गोताखोरी प्रणालियों और जीवन रक्षक सुविधाओं का भी प्रतीक है. ये दोनों प्रतीक मिलकर ‘निपुण’ की पूरी भूमिका को सामने रखते हैं. गोताखोर को समुद्र की गहराई तक ले जाना, वहां लंबे समय तक सुरक्षित रखना और सुरक्षित वापस लाना.
मजबूत होगी समुद्री सुरक्षा
‘निपुण’ के नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता और मजबूत होगी. खास तौर पर गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के नीचे हस्तक्षेप और पनडुब्बी बचाव अभियानों में नौसेना को अतिरिक्त क्षमता मिलेगी. इसका स्वदेशी निर्माण यह भी दिखाता है कि भारत का जहाज निर्माण क्षेत्र अब केवल नॉर्मल वॉरशिप तक सीमित नहीं है. देश में विशेष भूमिका वाले अत्याधुनिक पोत भी तैयार किए जा रहे हैं.

























































