नई दिल्ली: क्रिकेट के मैदान पर अक्सर कुछ ऐसा हो जाता है जिसके बारे में कल्पना भी नहीं किया जा सकता. MCG पर 45 साल पहले जो हुआ वो इतिहास की उन दुर्लभ घटनाओं में से एक है जिसने आंकड़ों के दिग्गजों को भी चकित कर दिया था. क्रिकेट के खेल में अक्सर एक गेंद पर अधिकतम 6 रन (छक्का) बनने की बात होती है, लेकिन 1981 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंडने एक ऐसी घटना देखी जिसने क्रिकेट की ‘रिकॉर्ड बुक’ में एक अनोखा अध्याय जोड़ दिया.
ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच खेले गए इस टेस्ट मैच में कुछ ऐसा हुआ जो आज के दौर में अकल्पनीय लगता है बल्लेबाजों ने बिना किसी एक्स्ट्रा (नो-बॉल या वाइड) के एक ही लीगल गेंद पर 7 रन बना दिए. इस ऐतिहासिक घटना में जितना योगदान बल्लेबाज के शॉट और उनकी फिटनेस का था उससे ज्यादा मैदान के साइज था. इस मैच को देखने 80000 हजार फैंस मेलबर्न पहुंचे थे जिन्होंने ये नजारा देखा.
डेनिस लिली की रफ़्तार और माजिद खान का क्लास
यह वाकया तब हुआ जब क्रीज पर पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाज माजिद खान और मुदस्सर नज़र मौजूद थे. गेंदबाजी की कमान महान तेज गेंदबाज डेनिस लिली के हाथों में थी. लिली की एक तेज रफ्तार गेंद पर माजिद खान ने अपने सिग्नेचर स्टाइल में बैकफुट पर एक बेहतरीन कट शॉट खेला. गेंद तेजी से डीप पॉइंट की ओर बाउंड्री की तरफ जाने लगी. माजिद और मुदस्सर दोनों विकेट के बीच तेज दौड़ के लिए जाने जाते थे. गेंद जैसे ही गैप में गई दोनों ने तेज रफ्तार से भागना शुरु कर दिया वहीं फील्डर ये सोच कर धीमा पड़ गया कि गेंद बाउंड्री पार कर जाएगी पर ऐसा हुआ नहीं.
धीमी आउटफील्ड फील्डिंग का ‘ब्लंडर’
मेलबर्न का मैदान अपनी विशालता के लिए जाना जाता है गेंद बाउंड्री लाइन के बेहद करीब जाकर धीमी हो गई, लेकिन रुकी नहीं जब तक फील्डर गेंद को पकड़ने के लिए दौड़ता, माजिद और मुदस्सर ने अपनी बिजली जैसी दौड़ से 4 रन पूरे कर लिए थे. कहानी यहीं खत्म नहीं हुई असली रोमांच तब शुरू हुआ जब फील्डर ने आपा खोकर एक खराब थ्रो (ओवर थ्रो) फेंका. गेंद विकेटकीपर या गेंदबाज तक पहुँचने के बजाय दूर निकल गई. इस मौके का फायदा उठाते हुए माजिद और मुदस्सर ने हार नहीं मानी और पागलों की तरह दौड़ते हुए 3 और रन बटोर लिए.
रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ ‘7’ रन
स्कोरबोर्ड पर एक लीगल डिलीवरी के सामने ‘7 रन’ दर्ज हो चुके थे. यह न केवल बल्लेबाजों की फुर्ती का सबूत था, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई फील्डिंग के उस पल के ‘ब्लंडर’ का नतीजा भी था. क्रिकेट के लंबे इतिहास में ऐसे मौके बहुत कम आए हैं जहाँ बाउंड्री के बिना या बिना किसी पेनल्टी के इतने रन बने हों. आज भी जब एमसीजी के ऐतिहासिक किस्सों का जिक्र होता है, तो 1981 का यह ‘7 रन वाला ओवरथ्रो’ प्रशंसकों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है.


























































