नई दिल्ली। देशभर में चल रहे मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) अभियान को लेकर राजनीतिक उठापटक जारी है। इसके बीच सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर को एक बेहद अहम सवाल खड़ा कर दिया। अदालत ने पूछा कि क्या केवल आधार कार्ड होना किसी व्यक्ति को भारत का मतदाता मानने के लिए पर्याप्त है- अगर वह “घुसपैठिया” ही क्यों न हो?
कोर्ट ने कहा कि क्या आधार रखने वाला हर व्यक्ति वोट डालने का हकदार हो जाए? यह टिप्पणी उस समय आई जब पश्चिम बंगाल और केरल की सरकारों ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में वैध मतदाताओं को भी सूची से हटाया जा रहा है।
क्या वोटर बनने के लिए भी आधार मान्य? – सुप्रीम कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की जगह अब CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई बार पड़ोसी देशों से आए लोग भारत में मजदूरी करते हैं, रिक्शा चलाते हैं या दिहाड़ी मज़दूर के रूप में काम करते हैं। उन्हें सरकार आधार कार्ड दे सकती है ताकि वे राशन जैसी मूल सुविधाएं पा सकें-यह संविधान की भावना है। लेकिन अदालत ने पूछा -यदि किसी घुसपैठिए को सिर्फ सरकारी लाभ देने के लिए आधार कार्ड जारी किया गया है, तो क्या इसका मतलब यह है कि उसे मतदाता भी बना दिया जाए?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, जो पश्चिम बंगाल और केरल की ओर से पेश हुए, ने कहा कि कई लोग आधार कार्ड रखते हैं, फिर भी SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक सॉफ्टवेयर से डुप्लिकेट मतदाताओं की पहचान किया जा सकता है, इसलिए बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को इतनी ताकत देना गलत है। इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सॉफ्टवेयर सिर्फ डुप्लिकेट हटाएगा, मृत मतदाताओं को नहीं। इसलिए BLO की भूमिका जरूरी है।
ड्राफ्ट लिस्ट में गलतियों पर क्या बोला SC
BLO सर्वे में गलतियों की शिकायतों पर जस्टिस बागची ने कहा कि कोई भी सर्वे 100% सही नहीं होता। इसी वजह से ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होती है, ताकि गलतियों को ठीक किया जा सके। अदालत ने कहा कि मृत और स्थानांतरित मतदाताओं की सूची न केवल वेबसाइट पर, बल्कि पंचायतों सहित स्थानीय स्तर पर भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे SIR को लेकर दायर याचिकाओं पर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता ठोस आधार पेश करते हैं, तो ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करने की समय-सीमा बढ़ाई जा सकती है।
तमिलनाडु मामले की सुनवाई 4 दिसंबर को और पश्चिम बंगाल मामले की सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। केरल में चल रही SIR को लेकर भी ECI और राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आधार कार्ड और मताधिकार को लेकर एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक सवाल खड़ा करती है।

























































