नई दिल्ली: बिहार जो एक समृद्ध संस्कृति और विरासत वाला राज्य है पिछले कुछ सालों में अपनी आर्थिक और वित्तीय स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देख रहा है. इसे भारत के कुछ आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों में से एक माना जाता है लेकिन लगातार किए जा रहे हैं सुधारों की वजह से यहां की स्थिति में काफी बदलाव आए हैं. आज हम बात करेंगे कि यह राज्य एक महीने में कितनी कमाई करता है. लेकिन उससे पहले जानते हैं यहां की अर्थव्यवस्था के बारे में.
बिहार की अर्थव्यवस्था
यहां की अर्थव्यवस्था ज्यादातर कृषि पर निर्भर है. चावल और गेहूं जैसी फसलें राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी का काम कर रही हैं. इसी के साथ सेवा क्षेत्र में भी राज्य में काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. कपड़ा और लघु उद्योग यहां लगातार विस्तार कर रहे हैं.
बिहार का मासिक राजस्व
अगर मार्च 2025 तक की बात करें तो बिहार की कुल राजस्व प्राप्ति लगभग 2.27 लाख करोड़ रुपए थी. यह आंकड़ा राज्य सरकार द्वारा टैक्स, शुल्क, फीस और बाकी राजस्व सहित अलग-अलग जरिए से अर्जित कुल आय को दर्शाता है.
औसत मासिक राजस्व की गणना की जाए तो सालाना प्राप्तियों को 12 महीना से विभाजित किया जाता है. इससे एक अनुमानित मासिक आय लगभग 18,900 करोड़ रुपए प्रति महीने निकल कर आती है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मौसमी आर्थिक गतिविधियों, टैक्स कलेक्शन चक्र और बाकी चीजें मासिक राजस्व को बदल सकती हैं.
प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि
हालांकि अभी तक बिहार आर्थिक रूप से कमजोर है लेकिन अब इसे गतिशील राज्यों में गिना जा सकता है. बिहार में प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. 2015-16 और 2021-22 के बीच प्रति व्यक्ति आय में 8.45% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट देखने को मिला है. इसी के साथ बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2023-24 में वर्तमान मूल्य पर 14.4% की दर से बढ़ रहा था.
बिहार सरकार द्वारा 2025-26 के लिए 3.17 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया है. इसमें सबसे ज्यादा अहमियत शिक्षा को ही दी गई है. इतना ही नहीं बल्कि 2024 25 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक बिहार ने 14.47% की दर से भारत में दूसरी सबसे ज्यादा विकास दर्ज की है. बिहार का मासिक राजस्व लगभग 18,900 करोड़ रुपए है. कई चुनौतियों के बावजूद भी राज्य वित्तीय सुधार, इंडस्ट्रियल ग्रोथ और कृषि विकास को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है. धीरे-धीरे यहां की आर्थिक स्थिति मजबूत होती जा रही है. इसके बाद आर्थिक गतिविधियों में काफी ज्यादा बढ़ावा देखने को मिल सकता है और बिहार को समृद्धि की तरफ ले जा सकता है.

























































