नई दिल्ली। अब कोई भी नागरिक ग्रामीण सड़कों की अच्छी-खराब हालत के बारे में तुरंत अपना फीडबैक विभाग को दे सकेगा। मंगलवार को ग्रामीण कार्य विभाग ने सभी कार्य प्रमंडलों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में क्यूआर कोड आधारित फीडबैक प्रणाली को लागू कर दिया है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को और अधिक पारदर्शी तथा कुशल बनाने के लिए अब ग्रामीण सड़कों के किनारे लगे रखरखाव वाले बोर्ड पर सड़कों का क्यूआर कोड लगाया जा रहा है।
कोई भी नागरिक अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर संबंधित सड़क की पूरी जानकारी हासिल कर सकता है। वह सड़क पर बने गड्ढे और उसमें हुई टूट-फूट की तस्वीरें खींचकर सड़क संबंधी फीडबैक सीधे विभाग को उपलब्ध करा सकता है।
वर्तमान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित सडकों के लिए क्यूआर कोड द्वारा निरीक्षण व्यवस्था बिहार के पांच जिलों सिवान, सुपौल, जमुई, गया तथा मुंगेर में जारी है। शेष जिलों में भी इसे जल्द लागू किया जाएगा।
ई मार्ग पोर्टल पर जाएगा फीडबैक
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित हरेक सड़क के लिए एक विशिष्ट क्यूआर कोड ईमार्ग पोर्टल के माध्यम से जेनरेट किया जाता है।
ई-मार्ग भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय का एक इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस पोर्टल है, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव को मैनेज और मानिटर करता है।
यह ठेकेदारों, अधिकारियों और संबंधित लोगों के लिए सड़कों के रखरखाव, बिलिंग (जीएसटी- आयकर कटौती सहित), निरीक्षण और पेमेंट की आनलाइन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाता है।
इंजीनियरों के कार्यों का मूल्यांकन
इंजीनियरिंग स्टाफ प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए अंक देते समय इन तस्वीरों की समीक्षा करते हैं। जिससे रख-रखाव की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनती है।
सार्वजनिक फीडबैक से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आती है। साथ ही वास्तविक तस्वीरों के आधार पर समस्याओं का तेजी से समाधान किया जाता है।
कुल मिलाकर यह प्रणाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से निर्मित सड़कों के पांच साल तक नियमित रख-रखाव को सुनिश्चित करने के लिए आम जनता को निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा बनाती है।

























































