नई दिल्ली: बीते कुछ सालों में दुनिया का माहौल जिस तरह बदला है, उसे देखते हुए भारतीय सेना कंप्लीट चेंज के मोड़ में पहुंच गई है. भारतीय सेना में एक-दो नहीं, बल्कि पांच मोर्चों पर अहम बदलाव किए जा रहा है. चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने संकेतों में ही भारतीय सेना में हो रहे इन बदलावों की पूरी कहानी बयां कर दी है.
सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए भारतीय सेना खुद को नए समय के मुताबिक तैयार कर रही है. भारतीय सेना इस पूरे प्रॉसेस को डिकेड ऑफ ट्रांसफार्मेशन की तरह देख रही है. इन बदलावों की नींव पांच मजबूत पिलर्स पर रखी गई है, जिसमें फोर्स रिस्ट्रक्चर, मॉडर्नाइजेशन एंड टेक्नोलॉजी, सिस्टम एण्ड प्रॉसेस, ह्यूमन रिसोर्स और इंट्रीगेशन शामिल हैं.
आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना अपने ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर की समीक्षा कर रही है, ताकि जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और स्पेस जैसे अलग-अलग डोमेन में एक साथ लड़ने की क्षमता बढ़ाई जा सके. ‘टेल ऐज ए टीथ शार्पनर’ के सिद्धांत के तहत ज्यादा असरदार यूनिट्स बनाई जा रही हैं. इसी सोच के तहत रुद्र ब्रिगेड, स्पेशल कमांडो बटालियन, तोपखाने के लिए शक्ति-1 आर्टिलरी रेजिमेंट और बैटरियां खड़ी की गई हैं. पिछले 14-15 महीनों में करीब 31 सरकारी अप्रूवल मिले हैं, जिनमें कोर का आधुनिकीकरण और एविएशन ब्रिगेड की स्थापना शामिल है. करीब पांच साल बाद टेरिटोरियल आर्मी की भर्ती दोबारा शुरू होना भी एक अहम फैसला माना जा रहा है.
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए तैयार हो रही भारतीय सेना
आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि अब सेना सिर्फ नए हथियारों पर नहीं, बल्कि पूरे टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम पर भी ध्यान दे रही है. इसमें बेहतर मूवमेंट, बेहतर सुरक्षा, नेटवर्क-आधारित ऑपरेशन, आधुनिक कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम शामिल हैं. बड़ी संख्या में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम सेना में जोड़े गए हैं. पहली बार कोर कमांडरों को इमरजेंसी प्रिक्योरमेंट के अधिकार दिए गए, जिससे न केवल समय बचेगा, बल्कि भारतीय इंडस्ट्री को भी फायदा होगा है. गोला-बारूद की 175 में से 159 कैटेगरी अब स्वदेशी हो चुकी हैं. सेना ने 2024–25 को ‘तकनीक का वर्ष’ और 2026–27 को नेटवर्किंग व डेटा-सेंट्रिक ऑपरेशन का साल बताया है.
मल्टी-डोमेन वॉरफेयर के लिए भी कमर कर रही है सेना
आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, तेज और बेहतर फैसलों के लिए सेना अपने सिस्टम और वर्किंग प्रोसेस को आसान और प्रभावी बना रही है. मल्टी-डोमेन वॉरफेयर को ध्यान में रखते हुए साइबर, स्पेस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और कॉग्निटिव डोमेन से जुड़ी रणनीतियों को अपडेट किया गया है. इसके साथ ही डिफेंस प्रोक्योरमेंट और फाइनेंशियल प्रोसेस को भी सरल और तेज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सेना का सबसे बड़ा हथियार उसका जवान है. टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. टेरिटोरियल आर्मी में मेडिकल और एजुकेशन कैडर शुरू किए गए हैं. महिला स्काइडाइविंग टीम बनाई गई है और सीपीटी-26 फिटनेस स्टैंडर्ड लागू किया गया है.
भारतीय सेना से जोड़ी गईं BSF और ITBP की 40 यूनिट्स
बेहद अहम डेवलपमेंट साझा करते हुए आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि सेना, वायुसेना और दूसरी एजेंसियां मिलकर कितनी प्रभावी तरीके से काम कर सकती हैं. थिएटर कमांड की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है. उन्होंने बताया कि बीएसएफ और आईटीबीपी की 40 यूनिट्स को सेना के नेटवर्क से जोड़ा गया है. गोला-बारूद, मेडिकल सपोर्ट और सप्लाई के लिए कॉमन सिस्टम पर काम चल रहा है. सीमा राज्यों में सिविल-मिलिट्री कोऑपरेशन के तहत 28 कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. स्टार्टअप्स को फंडिंग और आर्मी इंटर्नशिप प्रोग्राम भी शुरू किया गया है.

























































