नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पावन पर्व देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना के समर्पित होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के दौरान मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि का समापन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा से होता है।
इस बार नवमी 1 अक्टूबर, 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त मां सिद्धिदात्री की आराधना के साथ हवन और कन्या पूजन करने का विधान है। महानवमी के दौरान हवन करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है है। खासकर अष्टमी और नवमी के दिन सही विधि के साथ हवन पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। आइए जानते हैं नवमी की पूरी पूजा विधि और मंत्र।
नवमी पूजा मुहूर्त 2025
- महानवमी – 1 अक्टूबर 2025, बुधवार
- नवमी तिथि (प्रारम्भ) – शाम 06:07 बजे, 30 सितम्बर 2025
- नवमी तिथि (समाप्त) – शाम 07:02 बजे, 01 अक्टूबर 2025
नवमी हवन सामग्री सूची
नवरात्रि में हवन करने के लिए कई तरह की सामग्री की आवश्यकता होती है। पूजा शुरू करने से पहले आपको हवन कुंड, आम की लकड़ी, शुद्ध देसी घी, पान के पत्ते, सुपारी और सूखे नारिय की आवश्यक हैं। इसके अलावा कपूर, लाल कपड़ा, गंगाजल, चरणामृत, कलावा और आम के पत्तों की भी जरूरत पड़ती है। हवन के लिए लोबान, गुग्गल, जौ, काले तिल, चावल, शहद, लौंग भी शामिल की जाती हैं।
नवमी हवन विधि
- नवमी पर हवन करने से पहले स्थान को साफ कर लें।
- इसके बाद हवन कुंड व सामग्री व्यवस्थित करें।
- कपूर रखकर हवनकुंड में अग्नि प्रज्जवलित करें।
- हाथ में जल, फूल व चावल लेकर माता के सामने संकल्प लें।
- इसके बाद ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे या दुर्गा सप्तशती मंत्र से 108 आहुतियां दें।
- अंत में पूर्ण आहुति के लिए एक सूखा नारियल लें, उसे ऊपर से हल्का काटकर उसमें हवन सामग्री भर लें।
- आखिर में उसपर कलावा लपेटकर घी में डुबोएं और मंत्रोच्चार के साथ अग्नि को अर्पित कर दें।
- साथ ही‘ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा’ मंत्र का जप करें।
नवमी हवन मंत्र
- सबसे पहले ओम आग्नेय नम: स्वाहा मंत्र का जप करें।
- इसके बाद ओम गणेशाय नम: स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- इसके बाद ओम गौरियाय नम: स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम दुर्गाय नम: स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा बोलकर आहुति दें
- ओम हनुमते नम: स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम भैरवाय नम: स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम कुल देवताय नम: स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम स्थान देवताय नम: स्वाहास्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम विष्णुवे नम: स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम शिवाय नम: स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- स्वधा नमस्तुति स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहास्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- ओम गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा स्वाहा कहते हुए आहुति दें।
- अंत में ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।

























































