नई दिल्ली। दुनिया में इन दिनों जैसे परमाणु हथियार टेस्ट करने की मानो होड़ सी लग गई है. पहले रूस ने न्यूक्लियर मिसाइल और टॉरपीडो से दुनिया में दहशत फैला दी. नॉर्थ कोरिया कभी भी न्यूक्लियर मिसाइल टेस्ट करके हलचल मचा देता है. इस बीच पाकिस्तान और चीन ने भी अपने परमाणु हथियारों को टेस्ट किया है.
इसी को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिकी फौज को आदेश दे दिया है कि वे न्यूक्लियर हथियारों को टेस्ट करें. पाकिस्तान और चीन के न्यूक्लियर टेस्ट के कारण भारत के लिए दो फ्रंट्स पर टेंशन बढ़ना तय है. इसके बारे में हम आपको बताएंगे लेकिन पहले जान लेते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने क्या-क्या कहा?
ट्रंप ने दावा किया कि जिन देशों के पास भी न्यूक्लियर हथियार हैं, वे उसका टेस्ट कर रहे हैं- वे इस बारे में बात नहीं रहे. उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान छिप-छिपकर टेस्ट कर रहे हैं.
ट्रंप ने कहा, ‘रूस भी टेस्ट कर रहा है, चीन भी. वे इस बारे में बात ही नहीं करते हैं. हम एक ओपन सोसाइटी हैं. हम अलग हैं. हम इस बारे में बात करते हैं…उनके पास रिपोर्टर्स ही नहीं हैं, जो इस बारे में लिख सकें.’ उन्होंने पाकिस्तान तक आरोप बढ़ाते हुए ट्रंप ने दावा किया, ‘निश्चित रूप से उत्तर कोरिया टेस्ट कर रहा है. पाकिस्तान परीक्षण कर रहा है.’
CBS 60 मिनट्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप फिर अपना वही पुराना दावा दोहराते हुए कहा कि मई में भारत और पाकिस्तान न्यूक्लियर वॉर के मुहाने पर थे. उन्होंने व्यापार और टैरिफ का हवाला देकर युद्ध रुकवाया. अगर दोनों आगे बढ़ते तो लाखों लोग मारे जाते.
अब समझते हैं कि भारत के लिए कितना बड़ा खतरा है?
अगर भारत के दोनों पड़ोसी चीन पाकिस्तान न्यूक्लियर हथियारों का टेस्ट कर रहे हैं तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है. क्योंकि अगर पड़ोसी किसी बड़े प्लान की साजिश रच रहे हैं तो ऐसे में भारत के लिए भी जरूरी है कि वह अपनी तैयारी पूरी रखे. ताकि अगर भविष्य में कभी टू फ्रंट वॉर की स्थिति आए तो उसका डटकर मुकाबला किया जा सके.
हालांकि भारत की पॉलिसी है कि वह पहले न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा. लेकिन 1998 के बाद से उसने कोई परमाणु टेस्ट नहीं किया है. लेटेस्ट रिपोर्ट्स की माने तो भारत के पास 180 न्यूक्लियर हथियार हैं. जबकि चीन के पास 600 हैं. वह साल 2030 तक इसे 1000 तक ले जाने पर काम कर रहा है. जबकि पाकिस्तान के पास 170 न्यूक्लियर हथियार हैं.
हालांकि पाकिस्तान भी 2028 तक न्यूक्लियर हथियारों की संख्या 200 तक ले जाना चाहता है, जिसमें सामरिक परमाणु हथियार भी शामिल है. यह चीन का कमाल है. जैसे कि 2021 में टेस्ट किया गया फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम (FOBS) सबसे बड़ा खतरा है.
FOBS के तहत धरती की कक्षाओं में वॉरहेड्स को तैनात किया गया है, जिससे यह भारत के पृथ्वी डिफेंस व्हीकल इंटरसेप्टर्स की पकड़ से भी बच जाता है.
अब पोखरण-III का वक्त?
वहीं 1998 के पोखरण-II थर्मोन्यूक्लियर परीक्षण पर शक बना हुआ है, जिसे डीआरडीओ के वैज्ञानिक के संथानम ने ‘असफल’ बताया था, जिसमें 200 किलोटन के बजाय सिर्फ 10-15 किलोटन की क्षमता हासिल हुई थी, जिससे भरोसा और कम हुआ है.
अब ट्रंप ने भी कह दिया है कि वह न्यूक्लियर टेस्ट करेंगे क्योंकि चीन और पाकिस्तान छिप-छिपकर ऐसा कर रहे हैं. ऐसे में भारत के लिए यह सटीक मौका है कि वह पोखरण III कर दुनिया को अपनी शक्ति दिखा दे.
इससे भारत की हाइड्रोजन बम एफिशिएंसी पर ना सिर्फ मुहर लगेगी बल्कि अग्नि-VI इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (आईसीबीएम) या के-5 पनडुब्बी से लॉन्च मिसाइलों की ताकत का भी नमूना देखने को मिल जाएगा.

























































