पुरी। श्रीजगन्नाथ मंदिर के बहुचर्चित रत्न भंडार में सुरक्षित रत्न एवं आभूषणों की वास्तविक स्थिति को लेकर वर्षों से चले आ रहे संशय पर अब विराम लगने की संभावना है। रत्नभंडार में कुल कितने आभूषण हैं और वर्ष 1978 में हुई पिछली गणना के अनुसार रत्न व आभूषण आज भी यथावत हैं या नहीं—इसका खुलासा जल्द होने वाला है। इसी क्रम में आगामी 2 मार्च को श्रीजगन्नाथ मंदिर की प्रबंधन समिति की अहम बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में रत्नभंडार के आभूषणों की गणना की तिथि और शुभ मुहूर्त को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही रथयात्रा से पूर्व गुंडिचा मंदिर को कब खोला जाएगा, इस विषय पर भी अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
बैठक के एजेंडे में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल
सूत्रों के अनुसार, बैठक के एजेंडे में कई अन्य महत्वपूर्ण विषय भी शामिल हैं। इनमें सेवायतों के बच्चों के लिए आदर्श गुरुकुल की स्थापना, महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के लिए नए रनपलंग (खाट) सेट के उपयोग, मंदिर परिसर के भीतर पुलिसकर्मियों और सेवकों के लिए मोबाइल फोन पर प्रतिबंध, श्रीमंदिर कानून में संभावित संशोधन, नाटमंडप में श्रद्धालुओं के सुव्यवस्थित दर्शन तथा वातानुकूलित व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि इसी विषय को लेकर 24 फरवरी को श्रीजगन्नाथ मंदिर के सभा कक्ष में रत्नभंडार के आभूषणों की गणना संबंधी एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।
गणना की तिथि को अंतिम रूप देने की तैयारी
यह बैठक श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाढ़ी की अध्यक्षता में हुई थी। बैठक में आभूषणों की गणना प्रक्रिया को लेकर विस्तृत मंथन किया गया और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई थी।
अब उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए गणना की तिथि को अंतिम रूप देने के लिए प्रबंधन समिति की बैठक बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद रत्नभंडार से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और लंबे समय से प्रतीक्षित आभूषणों की गणना का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।

























































