भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर का आज 78वां स्थापना दिवस मनाया गया। 13 अप्रैल 1948 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस आधुनिक शहर की आधारशिला रखी थी। तब से लेकर आज तक भुवनेश्वर ने विकास की एक लंबी और प्रभावशाली यात्रा तय की है।1946 में जर्मन वास्तुकार ओटो कोएनिग्सबर्गर द्वारा तैयार मास्टर प्लान के आधार पर विकसित यह शहर आज देश के प्रमुख योजनाबद्ध शहरों में गिना जाता है।
कभी हरियाली से घिरा यह शहर अब तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदल चुका है, जहां आधुनिक सड़कें, बेहतर रोशनी, डिजिटल नेटवर्क और बदली हुई जीवनशैली इसकी नई पहचान बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने दी भुवनेश्वर वासियों को शुभकामना
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राजधानी भुवनेश्वर के 78वें स्थापना दिवस पर राजधानी वासियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा है कि मंदिरों की नगरी एकाम्र क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध भुवनेश्वर अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक विकास के अनोखे संगम के लिए जाना जाता है।
समय के साथ यह शहर न केवल ओडिशा की प्रशासनिक राजधानी बना, बल्कि आज वैश्विक स्तर पर शिक्षा, आईटी और खेल के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुका है।
मुख्यमंत्री ने राजधानी के विकास और गौरव को और आगे बढ़ाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया।नागरिकों से अपील की कि वे शहर को और अधिक स्वच्छ, सुंदर और प्रगतिशील बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और निरंतर विकास का अद्भुत संगम: राज्यपाल
वहीं, राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने राजधानी के लोगों को अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि आज भुवनेश्वर सिर्फ ऐतिहासिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी और खेल के क्षेत्र में तेजी से उभरता केंद्र बन चुका है।
राजधानी स्थापना दिवस के अवसर पर हम भुवनेश्वर का गौरवपूर्ण स्मरण करते हैं—एक ऐसा शहर, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और निरंतर विकास के अद्भुत संगम के लिए जाना जाता है।इतिहास की गहरी जड़ों में रचा-बसा भुवनेश्वर आज उद्देश्यपूर्ण प्रगति की राह पर आगे बढ़ते हुए निरंतर विकास, प्रेरणा और गौरव का प्रतीक बना हुआ है।
3000 साल पुराना इतिहास, 600 मंदिरों की पहचान
भुवनेश्वर का इतिहास करीब 3000 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां स्थित लगभग 600 मंदिरों के कारण इसे “मंदिरों की नगरी” कहा जाता है।
लिंगराज मंदिर, राजारानी मंदिर और मुक्तेश्वर मंदिर जैसे प्राचीन मंदिर इसकी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। ये सभी मंदिर कलिंग स्थापत्य शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
कटक से भुवनेश्वर बनी राजधानी
स्वतंत्रता के बाद 1948 में ओडिशा की राजधानी कटक से भुवनेश्वर स्थानांतरित की गई।आज भुवनेश्वर और कटक मिलकर ‘ट्विन सिटी’ के रूप में जाने जाते हैं।

























































