नई दिल्ली। अगर आप भी अपनी कार, बाइक, या कोई गाड़ी लेकर रोजाना पेट्रोल या डीजल भरवाने जाते हैं, तो आपके लिए बीमा से जुड़ा यह अपडेट बेहद जरूरी है. बिना वैध थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस वाली गाड़ी चलाना पहले से ही नियमों के खिलाफ है, लेकिन आने वाले समय में बिना बीमा वाले गाड़ियों के लिए पेट्रोल-डीजल लेना भी काफी मुश्किल हो सकता है.
दरअसल, बीमा नियामक IRDAI एक ऐसे सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है, जिसके जरिए पेट्रोल पंप पर गाड़ी में पेट्रोल-डीजल भरने से पहले नंबर प्लेट स्कैन करके उसके बीमा की स्थिति जांची जा सकेगी. इस प्रोजेक्ट के तहत ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) तकनीक की मदद से गाड़ी का नंबर पढ़ा जाएगा और उसे बीमा सूचना ब्यूरो (IIB) तथा VAHAN के रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा. फिलहाल इस सिस्टम को चुनिंदा शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है.
कैसे काम करेगी No Insurance-No Fuel सिस्टम?
- इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए पेट्रोल पंप पर आने वाले सभी गाड़ियों की नंबर प्लेट को ANPR कैमरे के जरिए स्कैन किया जा सकता है. इसके बाद गाड़ी नंबर के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि उस गाड़ी का वैध थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस है या नहीं.
- ANPR कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को पहचानने का काम करेंगे.
- वाहन का नंबर बीमा रिकॉर्ड से मिलाकर उसकी पॉलिसी की वैधता जांची जा सकेगी.
- IIB में मौजूद बीमा संबंधी जानकारी और VAHAN में दर्ज गाड़ी के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा.
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पेट्रोल पंप पर क्या बदल सकता है?
अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है और सिस्टम बड़े स्तर पर लागू होती है, तो फ्यूचर में पेट्रोल पंप पर ईंधन भरने से पहले गाड़ी का बीमा स्टेटस जांचने की व्यवस्था की जा सकती है. वैध थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस नहीं होने पर पेट्रोल या डीजल देने से इनकार करने का प्रवधान भी लाया जा सकता है. इससे खासतौर पर अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस की मांग बढ़ने की उम्मीद है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई तैयारी
दरअसल, यह पहल सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त के फैसले से जुड़ी है. कोर्ट ने IRDAI को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ मिलकर ऐसी पायलट परियोजना तैयार करने को कहा था, जिसमें वाहन के वैध बीमा और ईंधन की सप्लाई के बीच संबंध की संभावना को जांचा जा सके. हालांकि, इसपायलट प्रोजेक्ट का एक खास मकसद बिना बीमा वाले गाड़ियों की पहचान करना और वाहन मालिकों को जरूरी थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेने के लिए प्रेरित करना भी है.
कितने वाहन बिना बीमा के हैं?
सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में रजिस्टर्ड 30.48 करोड़ गाड़ियों में से 16.54 करोड़ गाड़ियों के पास वैध बीमा नहीं था. यानी करीब 56% रजिस्टर्ड गाड़ी इस दायरे में आते हैं.



















































