नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र इस बार शुरू होने से पहले ही चर्चा और टकराव के केंद्र में आ गया है। 1 दिसंबर से शुरू हो रहे इस सत्र में सरकार कुल 10 नए बिल पेश करने जा रही है, जिनमें कुछ बेहद अहम और विवादित प्रस्ताव शामिल हैं। सबसे ज्यादा बहस छेड़ने वाला प्रस्ताव है 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2025 (Constitution (131st Amendment) Bill, 2025) जिसे लेकर पंजाब की राजनीति में तूफान मच गया है।
15 बैठकों वाला यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा और जनवरी के बजट सत्र से पहले आखिरी सत्र होगा। विपक्ष चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता, आर्थिक चुनौतियों, केंद्र-राज्य संबंध और हाल ही में लागू हुए लेबर कोड जैसे मुद्दों को जोरशोर से उठाने की तैयारी में है।
कुल मिलाकर, संसद का यह शीतकालीन सत्र सिर्फ विधायी एजेंडा ही नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का भी मंच बनने जा रहा है और उसकी सबसे बड़ी वजह बना है 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2025।
क्या है 131वां संविधान संशोधन विधेयक?
शीतकालीन सत्र सबसे ज्यादा इसी बिल को लेकर सुर्खियों में है। संसद की सूची के मुताबिक, यह बिल चंडीगढ़ को संविधान के Article 240 के तहत लाने का प्रस्ताव रखता है। इसका मतलब है कि चंडीगढ़ को उन केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में रखा जाएगा, जिनके पास अपनी विधानसभा नहीं होती और जहां शासन से जुड़े कई फैसले भारत के राष्ट्रपति के नियमों के आधार पर लागू होते हैं।
फिलहाल Article 240 के दायरे में अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप, दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव और पुदुचेरी शामिल हैं। अगर यह संशोधन पारित हो जाता है, तो चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव संभव है। सबसे बड़ा संकेत यह है कि यहां एक में उपराज्यपाल की नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है, जबकि अभी पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक की भूमिका निभाते हैं। हालांकि सरकार ने इसे खारिज कर दिया है।
पंजाब में क्यों मचा था राजनीतिक तूफान
इस प्रस्ताव ने पंजाब की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी। सीएम भगवंत मान ने इसे पंजाब के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, “यह संशोधन पंजाब के हितों के खिलाफ है। चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है और हमारे गांवों को उजाड़कर बसाया गया था। हम इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।”
कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी इस कदम का विरोध करते हुए केंद्र पर “फेडरल स्ट्रक्चर कमजोर करने” का आरोप लगाया है। इस पूरे विवाद को देखते हुए केंद्र ने कदम पीछे खींचते हुए बयान जारी किया है कि फिलहाल चंडीगढ़ के प्रशासन में बदलाव लाने का कोई प्रस्ताव लागू नहीं किया जा रहा है।
न्यूक्लियर सेक्टर और हायर एजुकेशन में बड़े बदलाव की तैयारी
शीतकालीन सत्र के एजेंडे में सबसे पहले नजर जाती है सरकार के उस अहम कदम पर, जिसके तहत देश के न्यूक्लियर सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोला जा सकता है। इसके लिए The Atomic Energy Bill, 2025 पेश किया जाएगा, जिसके जरिये भारत में एटॉमिक एनर्जी के उपयोग और उसके नियमन को नए ढांचे में ढालने की तैयारी की गई है।
इसी सूची में एक और बड़ा बदलाव प्रस्तावित है-Higher Education Commission of India Bill। यह नया कानून UGC जैसी मौजूदा संस्थाओं को हटाकर उच्च शिक्षा के लिए एक केंद्रीकृत, पारदर्शी और स्वायत्त रेगुलेटरी सिस्टम स्थापित करेगा। इसके तहत विश्वविद्यालयों को अधिक आजादी और बेहतर अकैडमिक स्ट्रक्चर देने की कोशिश की जाएगी।
सत्र में आने वाले अन्य प्रमुख बिल
सत्र के एजेंडे में National Highways (Amendment) Bill और Corporate Laws (Amendment) Bill, 2025 भी शामिल हैं, जिनके तहत कंपनियों के कानून और LLP नियमों में बदलाव किए जाएंगे। इसके अलावा सरकार Securities Markets Code Bill, 2025 भी लाने जा रही है, जिसके तहत SEBI Act, Depositories Act और Securities Contracts Act को एकीकृत कर एक ही कोड में शामिल किया जाएगा।

























































