नई दिल्ली। पेट्रोल पंप पर अक्सर आपने देखा होगा कि कई लोग 100, 200 या 500 की जगह 110, 210 या 510 रुपये का पेट्रोल या डीजल भरवाते हैं. क्या आपने सोचा है आखिर ऐसा क्यों? ये सवाल सिर्फ आपके और हमारे ही नहीं बल्कि हर उस शख्स के मन में आता है जो पेट्रोल पंप पर ये देखता है. कई लोग तो एक दूसरे की देखा देखी में ऐसा करते हैं, लेकिन उन्हें इसके पीछे की वजह का पता नहीं है. तो आइये आपको बताते हैं कि क्या है ऐखिर ऐसा करने के पीछे वजह.
क्यों करते हैं लोग ऐसा?
ये मामला पूरी तरह से जागरुकता से भरा हुआ है. ये एक कोड है, जिससे ग्राहक बिना कुछ बोले ही पेट्रोल भरने वालों को बता देता है कि वो जागरूक व्यक्ति है. इसके पीछे एक दो नहीं बल्कि 4 कारण हैं, आइये बताते हैं.
‘प्रीसेट’ होती हैं मशीनें
दरअसल कुछ लोगों का मानना है कि पेट्रोल पंप पर मशीनें पहले से सेट (preset) होती हैं, जैसे 100, 200 या 500 रुपये के लिए. ऐसे में मन में हमेशा शक बना रहता है कि कहीं गाड़ी में कम मात्रा में पेट्रोल ना भरा जाए. इस वजह से लोग पेट्रोल हमेशा अनईवन अमाउंट में ही भरवाते हैं.
मानसिक संतुष्टि के लिए
हालांकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि इससे आपके साथ ठगी नहीं होगी, या आपको कम पेट्रोल नहीं मिलेगा. ये पूरी तरह से मानसिक शांति का सवाल है. ऐसे करने से ग्राहकों को मानसिक शांति मिलती है और वो ये सोचते हैं कि उन्हें किसी भी तरह से पेट्रोल पंप पर ठगा नहीं गया है.
पुरानी मशीनों का डर
ये धारणा कुछ पुरानी मशीनों और कुछ पुराने धोखाधड़ी के मामलों की वजह से भी बन गई है. हालांकि, आज के डिजिटल युग में ऐसी धोखाधड़ी कम होती है, लेकिन फिर भी लोग सुरक्षा के तौर पर ऐसा करते हैं.
पंप कर्मियों को सचेत करना
ग्राहकों के ऐसा करने से पंप कर्मी भी सचेत रहते हैं. उन्हें पता रहता है कि ग्राहक जागरुक है, ऐसे में वो उनके साथ कोई तीन- पांच नहीं कर सकते हैं. विषम संख्या में पेट्रोल भरवाने से मशीन के सेट होने का कोई खतरा नहीं रहता है.
ध्यान रखने वाली बातें…
हालांकि पेट्रोल भरवाते समय हमें कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. जैसे:
- पेट्रोल भरवाते समय हमेशा मीटर पर नजर रखें और चेक करें कि वो ‘जीरो’ से शुरू होता है या नहीं.
- पेट्रोल पंप पर हमेशा पेट्रोल भरवाने के बाद रसीद जरूर लेना चाहिए
- हमेशा ऐसा ही पंप पर जाएं जो भरोसेमंद और अधिकृत पंप हो.

























































