नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि ‘वृंदा’ के रूप में साक्षात देवी और ‘विष्णुप्रिया’ मानी गई हैं। आपने देखा होगा कि सदियों से हमारे घरों में बुजुर्ग शाम ढलते ही सबसे पहले तुलसी की चौखट पर दीया जलाते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का पौराणिक रहस्य क्या है? शास्त्रों में शाम के समय ही दीप जलाने पर इतना जोर क्यों दिया गया है? आइए, पुराणों के पन्नों से निकलकर जानते हैं इस पावन परंपरा के पीछे की दिव्य कथा।
पौराणिक कथा: जब लक्ष्मी बनीं तुलसी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी पूर्व जन्म में वृंदा थीं। उनकी अटूट भक्ति और पतिव्रत धर्म के कारण भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे हमेशा उनके साथ रहेंगी। भगवान विष्णु ने कहा था- “बिना तुलसी के पत्तों के मैं कोई भी भोग स्वीकार नहीं करूंगा और जो तुम्हारी सेवा करेगा, वह सीधे मेरे धाम को प्राप्त होगा।”
शाम के समय का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के समय को ‘असुर बेला’ या ‘संधिकाल’ कहा जाता है। इस समय दिन खत्म हो रहा होता है और रात शुरू होती है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण में उल्लेख है कि इसी समय नकारात्मक शक्तियां और दरिद्रता की देवी ‘अलक्ष्मी’ सक्रिय होती हैं।
भगवान विष्णु की आज्ञा से, माता लक्ष्मी ने तुलसी का रूप धरकर पृथ्वी पर वास किया ताकि वे अपने भक्तों की रक्षा कर सकें। जब हम शाम को तुलसी के पास दीपक जलाते हैं, तो वह प्रकाश माता लक्ष्मी को आमंत्रित करता है। मान्यता है कि जिस घर की तुलसी अंधेरे में रहती है, वहां लक्ष्मी कभी प्रवेश नहीं करतीं, बल्कि वहां दरिद्रता का वास हो जाता है।
शास्त्रों के अनुसार दीपदान के 5 अचूक लाभ
दरिद्रता का नाश (पद्म पुराण): पद्म पुराण में स्पष्ट लिखा है कि जो व्यक्ति संध्या के समय तुलसी के पास घी का दीपक रखता है, उसके घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती। यह दीप ‘समृद्धि का द्वार’ माना जाता है।
पितरों की तृप्ति: स्कंद पुराण के अनुसार, तुलसी के पास जलने वाला दीपक पितरों के मार्ग को भी रोशन करता है। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार को पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
वास्तु दोष से मुक्ति: तुलसी के पास दीपक जलाने से निकलने वाली अग्नि और तुलसी की पवित्र वायु मिलकर घर के वास्तु दोष को दूर करती है और गृह-क्लेश को समाप्त करती है।
अकाल मृत्यु से सुरक्षा: शास्त्रों में तुलसी के दीप को ‘यम का दीप’ भी माना गया है जो अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है और लंबी आयु प्रदान करता है।
मोक्ष का मार्ग: जो भक्त कार्तिक मास या प्रतिदिन शाम को दीप दान करते हैं, उन्हें अंत में वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
पूजा की सही विधि (शास्त्रों के अनुसार)
आसन का नियम: दीपक को कभी सीधे जमीन पर न रखें। उसके नीचे अक्षत (चावल) जरूर रखें।
मंत्र का जाप: दीया जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करें:
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते।।
कैसे करें पूजा?
हमेशा स्नान करके या हाथ-पैर धोकर ही दीप जलाएं और सिर ढक कर पूजा करें। तुलसी के पास शाम को दीपक जलाना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आध्यात्मिक सुरक्षा का कवच भी है। यह दीप हमें याद दिलाता है कि चाहे बाहर कितना भी अंधेरा क्यों न हो, भक्ति का एक छोटा सा दीया पूरे घर को सुख-समृद्धि से आलोकित कर सकता है।

























































