नई दिल्ली: देश में अब इंटरनेट कनेक्शन 107 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं. वहीं ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर की संख्या भी करीब 100 करोड़ तक पहुंच गई है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (meity) सचिव एस कृष्णन ने मंगलवार को पिछले 10 साल में भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत तेजी से मजबूत हुआ है. उन्होंने कहा कि सरकार की डिजिटल सर्विसेज का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है. डिजिलॉकर के 70 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं. यह प्लेटफॉर्म लोगों को अपने जरूरी डॉक्यूमेंट डिजिटल तरीके से सुरक्षित रखने की सुविधा देता है.
UPI से हर दिन 75 करोड़ ट्रांजैक्शन
यूपीआई ने भी देश में डिजिटल पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. अब इसके जरिए हर दिन करीब 75 करोड़ ट्रांजैक्शन हो रहे हैं. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है. सरकार के अनुसार, यूपीआई से जुड़े सिस्टम को अब तक 9 देशों ने अपनाया है. आने वाले समय में कई और देशों के इसमें शामिल होने की उम्मीद है.
डीबीटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एआई पर भी सरकार का फोकस
एस. कृष्णन ने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी सिस्टम के जरिए सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लोगों के बैंक खातों में पहुंच रहा है. इस समय सरकार 323 डीबीटी स्कीम चला रही है. इनके तहत अब तक 51.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम सीधे लाभार्थियों को भेजी जा चुकी है. इससे बीच में होने वाली गड़बड़ियां कम हुई हैं और वेलफेयर स्कीम की डिलीवरी बेहतर हुई है. उन्होंने कहा कि 2014 में भारत अपने ज्यादातर स्मार्टफोन बाहर से मंगाता था. लेकिन अब स्मार्टफोन देश के सबसे बड़े एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स में शामिल हो गए हैं.
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में देश की वैल्यू एडिशन भी काफी बढ़ी है. साथ ही सरकार का सेमिकंडक्टर मिशन भी तेजी पकड़ रहा है. अब तक 12 सेमिकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है. सीजी सेमी की ओर से तैयार किया जा रहा सेमिकंडक्टर प्लांट इसी हफ्ते शुरू होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि सरकार टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनने और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब बनाने पर लगातार काम कर रही है.
भारत का एआई आत्मनिर्भर विजन
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े दुनिया भर के बदलावों पर भी नजर बनाए हुए है. अमेरिका समेत कई देश एडवांस एआई टेक्नोलॉजी के लिए नए सेफगार्ड और अप्रूवल फ्रेमवर्क बना रहे हैं. इसकी वजह एआई का साइबर सिक्योरिटी समेत कई अहम क्षेत्रों पर बड़ा असर है. सरकार स्वदेशी एआई मॉडल और नई क्षमताएं विकसित करने के प्रयासों को समर्थन दे रही है. उनका कहना है कि भारत की बड़ी आबादी, टैलेंट और तेजी से बढ़ रहे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए देश के लिए अहम टेक्नोलॉजी में रणनीतिक आत्मनिर्भरता बनाए रखना जरूरी है.





























































