नई दिल्ली। सुरक्षा बढ़ाने की दशा में एक बड़े कदम के तौर पर, DGCA ने गुरुवार को भारत में पहली बार जेट इंजन वाले विमान पर सैटेलाइट-बेस्ड लैंडिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके लैंडिंग करवाई।
रेगूलेटर ने उदयपुर में इंडिगो के एयरबेस A320 विमान की उड़ान के लिए इसरो की एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सैटेलाइट-बेस्ड लैंडिंग सिस्टम ‘गगन’ (GPS-एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन) का इस्तेमाल किया। टर्बोप्रॉप ATR विमान द्वारा ऐसा करने के कुछ साल बाद अब जेट इंजन वाले विमान भी इस तकनीक का इस्तेमाल करने लगे हैं।
SLS को उन छोटे एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा बढ़ाने के मामले में एक गेम-चेंजर माना जाता है, जहां महंगे इंस्ट्रमेंट लैंडिंग सिस्टम नहीं लगे हैं, क्योंकि यह नई सैटेलाइट नेविगेशन तकनीकों का इस्तेमाल करने लैंडिंग की प्रक्रिया पूरी करने करने की सुविधा देता है। SLS सबसे पहले 2015 में यूरोप में A320 विमान के साथ सेवा में आया था।
सैटेलाइट-बेस्ड नेविगेशन को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम उपलब्धि
मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि उदयपुर के लिए इंडिगो एयरबस की उड़ान, “वर्टिकल गाइडेंस के साथ लोकलाइजर परफॉर्मेंस अप्रोच को सफलतापूर्वक पूरा करके भारत में सैटेलाइट-बेस्ड नेविगेशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और अहम उपलब्धि” थी।
इंडिगो ने 2022 में अपने ATR फ्लीट पर LPV ऑपरेशन शुरू किया था और अब अपने सभी विमानों में “सैटेलाइट-बेस्ड ऑग्मेंटेशन सिस्टम” वाली सुविधा का विस्तार किया है।
ISRO और AAI ने संयुक्त रूप से किया विकसित
ISRO और AAI द्वारा संयुक्त रूप से विकसित, भारत का SBAS ‘गगन’ भारतीय हवाई क्षेत्र में LPV प्रक्रियाओं के लिए जरूरी कवरेज देता है और भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल करता है जिनके पास अपनी SBAS क्षमता है।
जैसे-जैसे ज्यादा एयरपोर्ट LPV प्रक्रियाओं को अपनाएंगे और ज्यादा एयरलाइंस अपने विमानों को SBAS क्षमता से लैस करेंगी, उम्मीद है कि ‘गगन’ हवाई यात्रा को सुरक्षित, ज्यादा कुशल और सुलभ बनाकर भारतीय एविएशन के भविष्य में अहम भूमिका निभाएगा।





























































