नई दिल्ली। सनातन धर्म में किसी भी पूजा-पाठ या शुभ काम करने से पहले दीपक जलाया जाता है। माना जाता है कि, दीप प्रजवल्लित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, पॉजिटिव एनर्जी का संचार बना रहता है।
दीपक जिसे अंधकार पर जीत का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में इसे त्रैलोक्यमिरापहम् कहा जाता है, यानी कि दीयों का उद्देश्य तीर्थ लोकों में अंधेरे का नाश करना है। कभी सोचा है कि, आखिर पहली बार किसने दीपक जलाया होगा; आखिर क्यों इसे पूजा-पाठ के दौरान इस्तेमाल किया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे का सच।
दीपक की उत्पत्ति कैसे हुई?
माना जाता है कि, अग्नि सृष्टि में तीन रूप में मौजूद है। अंतरिक्ष में विद्युत, आकाश में सूर्य और पृथ्वी पर अग्नि। संस्कृत की एक पंक्ति ‘सूर्यशं सभवो दीप:’ अर्थात्, सूर्य के अंश से ही दीपक की उत्पत्ति हुई है।
हिंदू धर्म में दीपक के प्रकाश को अत्यंत पवित्र माना गया है। मांगलिक कार्यों से लेकर ईश्वर की प्रार्थना तक इसका इस्तेमाल जरूरी बताया गया है।
दीया जलाने की परंपरा?
माना जाता है कि, दीया जलाने से जुड़ा इतिहास भारतीय सभ्यता के शुरुआती दौर यानी वैदिक काल से जुड़ी मानी जाती है। वेदों के मुताबिक, अग्नि को पवित्र तत्व माना जाता है जिसे इंसानों और भगवानों के बीच संदेशवाहक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
कुछ पुरातत्व से जुड़े सबूत बताते हैं कि, इनका इस्तेमाल सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान करीब 2600 ईसा पूर्व में किया गया था।
वैदिक काल में दीपक की शुरुआत
माना जाता है कि, वैदिक काल में दीया जलाने की शुरुआत यज्ञ जैसे पवित्र अग्नि अनुष्ठानों से जुड़ी थी, जहां ईश्वर की प्रार्थना से लेकर आरती और दैवीय शक्तियों के साथ संवाद करने के लिए अग्नि का प्रयोग किया जाता था।
शुरुआत दौर में दीये की बनावट काफी सामान्य होती थी और इन्हें तेल या घी से भरा जाता था और इनका प्रयोग रोशनी करने के साथ आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता था।
दीयों से जुड़ी पौराणिक कथा क्या कहती है?
भारतीय पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक रोशनी और दीपक के महत्व से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। यही कथाएं पूजा और शुभ कार्यों में दीपक के महत्व को बताती है।
एक कथा के मुताबिक माना जाता है कि, जब भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या लौटे, तो लोगों ने उनके स्वागत के लिए हजारों दीपक जलाए। उस वक्त से जीत और खुशी के प्रतीक के रूप में दीया जलाना परंपरा का हिस्सा बना गया।






























































