नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2026 के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत (India GDP growth Forcast) रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और नीतिगत अनिश्चितता के चलते वैश्विक वृद्धि दर घटकर 2.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
यूएन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि मजबूत मांग भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी के असर को कुछ हद तक कम कर सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में भारत की वृद्धि दर का अनुमान पहले 7.4 प्रतिशत से कम कर दिया है। यह इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुमान के मुताबिक ही है, जो भारत को एकमात्र ऐसी बड़ी इकॉनमी बताता है जिसके 2025-26 में 6 परसेंट से ज्यादा ग्रोथ दर्ज करने की उम्मीद है।
UN ने अपनी रिपोर्ट में क्या बताया?
यूएन ने अपनी ‘World Economic Situation and Prospects 2026’ रिपोर्ट में कहा है कि दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को महामारी से पहले के समय की तुलना में लंबे समय तक धीमी वृद्धि का खतरा है, क्योंकि मौजूदा वृद्धि दर बड़े पैमाने पर विकास संबंधी लाभ देने में नाकाम रही है, जिससे कई देश, समुदाय और परिवार पीछे रह गए हैं।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि भू-राजनीतिक तनाव, नीतिगत अनिश्चितता और राजकोषीय चुनौतियों ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को धुंधला कर दिया है। 2026 में वैश्विक वृद्धि नमर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि कमजोर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मौद्रिक मदद से कुछ हद तक ही संभाला जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ज्यादातर इकोनॉमी में महंगाई काफी कम हो गई है फिर भी रहने का बढ़ता खर्च घरेलू बजट पर दबाव डाल रहा है और असमानता को बढ़ा रहा है। सप्लाई में फिर से रुकावट का खतरा बना हुआ है।

























































