भुवनेश्वर: लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान ओडिशा के सांसद प्रताप चंद्र सारंगी ने संस्कृत में अपनी बात रखी। वह अभी तक की चर्चा में संस्कृत में बोलने वाले पहले सांसद हैं। सांरगी दिसंबर, 2024 में तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने राहुल गांधी पर धक्का देने का बड़ा आरोप लगाया था।
लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर जब सांरगी ने संस्कृत में अपनी बात रखी तो स्पीकर की कुर्सी पर जगदंबिका पाल बैठे थे। सारंगी ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए लोकसभा की 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व करने के फैसले का मजबूती से समर्थन किया। गौरतलब हो की नारी वंदन शक्ति अधिनियम 2023 में संसद के दोनों सत्रों से पास हुआ था। अब केंद्र सरकार लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ इस अमल में लाने की ओर बढ़ रही है।
कौन हैं प्रताप चंद्र सारंगी ?
प्रताप चंद्र सारंगी का जन्म 4 जनवरी 1955 को गोपीनाथपुर, नीलगिरी, बालासोर के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने 1975 में उत्कल विश्वविद्यालय के तहत बालासोर के फकीर मोहन कॉलेज से स्नातक की डिग्री पूरी की। बचपन से ही सारंगी आध्यात्मिक साधक थे। वह रामकृष्ण मठ के साधु बनना चाहते थे।
उन्होंने काफी कई यात्राएं भी की हैं। मठ के साधुओं ने सारंगी से उनकी इच्छा के बारे में चर्चा की। मां के जोर देने पर सारंगी अपने गांव लौटे और फिर विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में शामिल हो गए। प्रताप चंद्र सारंगी दूसरी बार के सांसद हैं। वह ओडिशा के बालासोर से सांसद से जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। पहली बार 2019 में जीते थे। सारंगी अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। वह कछ समय के लिए मोदी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। सारंगी पहली बार 2014 में भी लोकसभा का चुनाव लड़े थे तब वह हार गए थे। लोकसभा सदस्य बनने से पहले वह ओडिशा में विधायक भी रह चुके हैं।

























































