नई दिल्लीः लाइट इंजनों (बिना डिब्बे वाले अकेले इंजन) से जुड़ी हालिया दो साइड-टक्कर की घटनाओं के बाद, रेलवे बोर्ड ने लाइट इंजन ऑपरेशन्स की एक विशेष सुरक्षा समीक्षा शुरू की है. इसके तहत चालक दल की सतर्कता, सिग्नल का पालन करने और ब्रेक लगाने के निर्देशों के अनुपालन की जांच के लिए औचक निरीक्षण (ambush checks), फुटप्लेट निरीक्षण और रात के समय चेकिंग को तेज किया जाएगा.
साथ ही लाइट इंजनों से जुड़े हादसों या घटनाओं के मामलों का विश्लेषण भी किया जाएगा. इसके अलावा, सिस्टेमिक कमियों (व्यवस्थागत कमियों) की पहचान करने और निवारक उपाय करने के लिए मंडल स्तर पर टावर वैगनों और ट्रैक मशीनों की समीक्षा और विश्लेषण किया जाएगा. रेल अधिकारी ने कहा कि रेलवे ने ट्रेन सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लाइट इंजनों के सुरक्षित संचालन को एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में रेखांकित किया है.
रेलवे ने 11 से 25 जून तक 15 दिनों का एक विशेष सुरक्षा अभियान चलाने का निर्देश दिया है. इसके तहत कर्मचारियों की काउंसलिंग करने, फुटप्लेट निरीक्षण (ड्राइवर के केबिन में चेकिंग) और औचक निरीक्षण करने पर विशेष जोर दिया जाएगा.
इस अभियान के दौरान निम्नलिखित बातों की कड़ी निगरानी की जाएगी:
- ‘YY’ (डबल पीला) और ‘Y’ (पीला) सिग्नल दिखने पर तय रफ्तार का पालन करना.
- सही समय पर ब्रेक लगाना और ब्रेक लगाने के तरीकों का विश्लेषण करना.
- असिस्टेंट लोको पायलटों (ALPs) द्वारा आरएस वाल्व (RS Valve) को संभालने और आपातकालीन ब्रेक लगाने की प्रक्रिया.
- सिग्नल दिखने पर ड्राइवरों द्वारा उसे बार-बार दोहराना और एक-दूसरे को इसकी पुष्टि करना.
- ड्राइवरों के लंबे ड्यूटी घंटों, समय से ज्यादा काम करने वाले क्रू और उनकी सतर्कता की निगरानी करना.
30 जून तक जांच रिपोर्ट
रेलवे ने सभी संबंधित इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे चल रही सुरक्षा जांच को पूरा करें और 30 जून तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें. पूरे नेटवर्क में परिचालन सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों के तहत, इन रिपोर्टों में निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के साथ-साथ उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित सुधारात्मक कदमों को शामिल किया जाएगा.
लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों की काउंसलिंग
रेलवे ने इकाइयों को लोको पायलटों (एलपी) और सहायक लोको पायलटों (एएलपी) के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित करने का निर्देश दिया है, जिसमें सिग्नलों के पास पहुंचते समय निर्धारित गति सीमाओं का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया गया है. इस अभियान के तहत चेतावनी वाले ‘Y’ (पीले) सिग्नल को पार करने के बाद तब तक बार-बार “रेड अहेड” (आगे लाल सिग्नल है) बोलने की प्रथा को भी मजबूत किया जाएगा, जब तक कि ट्रेन पूरी तरह से रुक न जाए या आगे का सिग्नल साफ न हो जाए.
अधिकारियों ने सही समय पर आरएस वाल्व के इस्तेमाल को लेकर सहायक लोको पायलटों (ALPs) की काउंसलिंग करने की आवश्यकता पर जोर दिया है. एएलपी को सलाह दी जा रही है कि जब भी ट्रेन निर्धारित गति सीमा से आगे बढ़े या लोको पायलट (ड्राइवर) की प्रतिक्रिया कम पाई जाए, तो वे तुरंत हस्तक्षेप करें.
इस अभियान के तहत, एएलपी को आपातकालीन स्थितियों में इमरजेंसी ब्रेक लगाने का आत्मविश्वास देने के लिए आरएस वाल्व को संभालने का व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) अभ्यास कराया जा रहा है. इस व्यावहारिक प्रशिक्षण का उद्देश्य दबाव की स्थिति में सही निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि एएलपी जरूरत पड़ने पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार रहें, जिससे ट्रेनों का सुरक्षित संचालन हो सके.
ब्रेक लगाने के तौर-तरीकों का विश्लेषण
यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी ट्रायल उच्चतम सुरक्षा मानकों के तहत किए जाएं, लाइट इंजन के सभी ट्रायलों के दौरान मुख्य लोको निरीक्षक (CLIs) हमेशा लोको पायलटों (LPs) के साथ मौजूद रहेंगे. उनकी मौजूदगी से सुरक्षा सावधानियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और परिचालन के तरीकों की बारीकी से निगरानी करने में मदद मिलेगी.
इन ट्रायलों को डेटा लॉगर और रियल-टाइम ट्रेन इंफॉर्मेशन सिस्टम (RTIS) से मिलने वाले डेटा के विस्तृत विश्लेषण का भी सहयोग मिलेगा. तकनीक पर आधारित इस दृष्टिकोण से ट्रेन को संभालने के तरीकों के बारे में मूल्यवान जानकारियां मिलने, प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन करने और परिचालन सुरक्षा व विश्वसनीयता बढ़ाने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
क्या कहना है लोको पायलटों का
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष राम राज भगत ने ईटीवी भारत को बताया- “हालांकि रेलवे ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से सुरक्षा समीक्षा करता है, लेकिन यह देखा गया है कि हाल के वर्षों में एसपीएडी की घटनाएं बढ़ी हैं. इसका मुख्य कारण कर्मचारियों की कमी और लोकोमोटिव पायलटों व सहायक लोकोमोटिव पायलटों को पर्याप्त आराम न मिलना है.”
उत्तरी क्षेत्र में तैनात एक लोको पायलट ने नाम न छापने की शर्त पर ईटीवी भारत को बताया- “रेलवे ने लाइट इंजनों के संचालन के लिए पहले ही दिशानिर्देश जारी किए हैं, क्योंकि कुछ लोको पायलट इन्हें कम गंभीरता से लेते हैं क्योंकि वे ट्रेन नहीं खींच रहे होते हैं. हालांकि, रेलवे ने इस बात पर जोर दिया है कि लाइट इंजन चलाते समय सभी निर्धारित नियमों और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए.”
























































