भुवनेश्वर: ओडिशा में पांचवीं कक्षा की सरकारी अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में हुई एक बड़ी गलती ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्रों को पढ़ाने के लिए तैयार की गई किताब में मशहूर बॉलीवुड गीत ‘निंबूड़ा निंबूड़ा’ के बोल छप जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया. सोशल मीडिया पर लोग इस चूक को लेकर हैरानी जता रहे हैं, जबकि शिक्षा विशेषज्ञ इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं.
मामले की गूंज सरकार तक पहुंची तो राज्य के स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने साफ कहा कि ऐसी गलतियां किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएंगी और छात्रों तक सही सामग्री पहुंचाने के लिए संशोधित पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी.
किताब में छपा ‘निंबूड़ा’ गाना
पूरा मामला ओडिशा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली कक्षा 5 की अंग्रेजी पुस्तक से जुड़ा है. किताब के एक अध्याय में वर्ष 1999 की चर्चित फिल्म हम दिल दे चुके सनम का लोकप्रिय गीत ‘निंबूड़ा निंबूड़ा’ लगभग हूबहू प्रकाशित हो गया. यह गीत मूल रूप से एक राजस्थानी लोकगीत है, जिसे फिल्म में ऐश्वर्या राय पर फिल्माया था. जैसे ही यह गलती सामने आई, लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर इतनी बड़ी चूक किताब की जांच प्रक्रिया के दौरान कैसे नजरअंदाज हो गई.
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा और प्रकाशन प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. लोगों का कहना है कि स्कूली किताबें बच्चों की शिक्षा का आधार होती हैं, इसलिए उनके हर पन्ने की कई स्तरों पर जांच होनी चाहिए. ऐसे में एक फिल्मी गीत का पाठ्यपुस्तक में शामिल हो जाना विभागीय लापरवाही का संकेत माना जा रहा है.
मंत्री ने कहा- सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया
ओडिशा के स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने कहा कि सरकार ने इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर पाठ्यपुस्तकों में पाई गई त्रुटियों की जांच के लिए एक समिति बनाई थी. समिति ने पूरे मामले की जांच की और जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आई, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई.
सभी स्कूलों में भेजी जाएंगी संशोधित किताबें
मंत्री ने कहा कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए संशोधित और त्रुटिरहित पाठ्यपुस्तकों की प्रतियां सभी सरकारी स्कूलों में भेजी जाएंगी. उन्होंने बताया कि शिक्षकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल संशोधित पुस्तकों का उपयोग करें और यदि कहीं कोई गलती हो तो उसे सुधारकर छात्रों को सही जानकारी दें.
शिक्षाविदों ने जताई चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की किताबों के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है. उनका कहना है कि छोटी उम्र के छात्र किताबों में लिखी हर बात को सही मानते हैं, इसलिए पाठ्य सामग्री को अंतिम रूप देने से पहले कई चरणों में उसकी जांच जरूरी है.





























































